वाराणसी। ओला और बारिश से फसलों को भारी नुकसान हुआ है। किसानों को राहत देने के लिए केंद्र सरकार मुआवजे के नियमों में परिवर्तन करने जा रही है। साथ ही, रबी की फसलों की खरीद के मानकों में भी ढील दी जाएगी। यह बात केंद्रीय उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्री राम विलास पासवान ने कही।
सर्किट हाउस में मंगलवार को पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार किसानों को हित में काम करने के लिए कटिबद्ध है। भूमि अधिग्रहण अधिनियम को भी उन्होंने कृषकों और खेत मजदूरों के हित में बताया।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि अनियमित बारिश और ओला के चलते देश भर में फसलों को नुकसान पहुंचा है। केंद्र सरकार इसका जायजा ले रही है। मौजूदा समय में किसान की 25 फीसदी तक फसल नष्ट होने पर कोई भरपाई नहीं की जाती है। न राज्य सरकार मुआवजा देती है और न बीमा कंपनियां। सरकार मुआवजे के नियमों को आसान बनाने के लिए कानून बदलने की तैयारी कर रही है।
राज्य सरकारों से भी अपील है कि वे अपने स्तर से भी किसानों के नुकसान की भरपाई करें। उत्तर प्रदेश सरकार से अनियमित वर्षा के मद्देनजर गेहूं खरीद के मानक में छूट देने का अनुरोध किया है। इसके लिए भारतीय खाद्य निगम, खाद्य मंत्रालय, उत्तर प्रदेश सरकार के अधिकारियों की संयुक्त टीम बनाई गई है। यह टीम सैंपलिंग और विश्लेषण करेगी और उसकी रिपोर्ट के आधार पर खरीद के मामले में रियायत दी जाएगी
उन्होंने कहा कि खाद्य सुरक्षा कानून 2014 के जुलाई माह में ही लागू किया जाना था लेेकिन महज 11 प्रांतों में ही इसे लागू किया जा सका है। इस साल जून तक इसे लागू करने की अवधि बढ़ाई गई है और उत्तर प्रदेश सरकार से अपील है कि वे जल्द से जल्द लाभार्थियों का राशनकार्ड तैयार करा दें।
सार्वजनिक वितरण प्रणाली को कारगर बनाने के लिए कोटेदारों को हर महीने कम से कम 10 हजार रुपये लाभ की गारंटी और उनके घर तक अनाज पहुंचाने की व्यवस्था की गई है। उत्तर प्रदेश में सालाना 21 लाख टन चावल और गेहूं की खरीद हो पाती है जबकि यहां 80 लाख टन का वितरण किया जाता है। इस अंतर को पाटने के लिए पंजाब और हरियाणा से गेहूं और चावल मंगाना पड़ता है।