युवा चेतना की ओर से आयोजित युवा सम्मेलन का बलिया से आगाज
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केंद्रीय सूचना आयुक्त प्रो. एम. श्रीधर आचार्यूलू ने कहा कि मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम, जयप्रकाश नारायण व शहीद मंगल पांडेय की कार्यशैली एक रही और सभी ने सत्ता से दूर रह कर संघर्ष किया। जिस तरह सत्ता को छोड़कर वनवास को चुनने वाले श्रीराम, सत्ता के खिलाफ लड़ने वाले शहीद मंगल पांडेय व 70 साल की उम्र में सत्ता के खिलाफ उठ खड़े होने वाले जयप्रकाश नारायण के संघर्ष ने मिसाल कायम की। उसी प्रकार बलिया की धरती से युवा चेतना द्वारा आयोजित युवा सम्मेलन देश के युवाओं को एक नई दिशा देगा। व बलिया के टाउनहाल में सोमवार को युवा चेतना द्वारा आयोजित युवा सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे।
प्रो. आचार्यूलू ने कहा कि इमरजेंसी का कारण जेपी का आंदोलन रहा। देश में सत्ता परिवर्तन करने का काम भी इसी आंदोलन ने किया। जयप्रकाश नारायण की प्रेरणा से उनके शिष्य नेताओं ने ही तेलंगाना के लिए भी आंदोलन किया और आज तेलंगाना अलग राज्य है। जेपी के भूदान आंदोलन का असर तेलंगाना में भी रहा और हजारों एकड़ जमीन लोगों ने दान कर दी।
वरेंगल के प्रजा कवि नारायण राव ने जेपी के निधन पर लिखा कि जन्म आपका, मरण आपका लेकिन आपकी जिंदगी देश के लिए। अपने संबोधन के दौरान उन्होंने जनसमूह से संवाद करते हुए पूछा कि देश में क्या हो रहा है? भ्रष्टाचार कम हो रहा है क्या, बेरोजगार कम हो रहे हैं क्या, युवाओं को काम मिल रहा है क्या, सुशासन है क्या? उन्होंने देश को मजबूत करने के लिए युवाओं से आगे आने का आह्वान किया।
भ्रष्टाचार से लड़ने में कारगर है सूचना का अधिकार
केंद्रीय सूचना आयुक्त प ने कहा कि आज देश की जनता के हाथ में अधिकार व हथियार दोनों हैं। जिससे वह परिवर्तन ला सकते हैं। एक तो चुनाव है और दूसरा सूचना का अधिकार। भ्रष्टाचार का खुलासा करने के लिए सूचना का अधिकार का हथियार काफी कारगर है।
बलिया ने देश को दिशा दी है, फिर देगा : स्वामी अभिषेक
लोकनायक जयप्रकाश नारायण की स्मृति में बलिया स्थित टाउन हॉल में सोमवार को युवा चेतना के तत्वावधान में युवा सम्मेलन का आयोजन किया गया। इसमें लोकनायक जेपी को याद करते हुए स्वामी अभिषेक ब्रह्मचारी ने कहा कि देश के युवाओं को जय प्रकाश नारायण के दिखाए हुए रास्ते पर चलना होगा। साथ ही कहा कि बलिया ने देश को दिशा दी है, आगे भी देगा।
इससे पहले कार्यक्रम का उद्घाटन स्वामी अभिषेक ब्रह्मचारी, भारत सरकार के केंद्रीय सूचना आयुक्त प्रो. एम श्रीधर आचार्यूलू एवं युवा चेतना के राष्ट्रीय संयोजक रोहित कुमार सिंह एवं ई. अजय मिश्रा ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्ज्वलित कर किया। आगंतुक अतिथियों ने दीप प्रज्ज्वलन के उपरांत लोकनायक जयप्रकाश नारायण के चित्र पर पुष्पांजलि कर उनका नमन किया।
स्वामी अभिषेक ब्रह्मचारी ने कहा कि जयप्रकाश नारायण महामानव थे, उन्होंने आजीवन संघर्ष किया। उनके संपूर्ण क्रांति आंदोलन को पूरा विश्व जानता है। आपातकाल के दौरान पूरे देश ने जयप्रकाश के व्यक्तित्व पर विश्वास जताया। कहा देश के प्रति निष्ठा का भाव समाप्त होता जा रहा है, युवाओं को लोग दिग्भ्रमित कर रहे हैं, ऐसी परिस्थितियों में जयप्रकाश के दिखाए हुए रास्ते पर चलना होगा। स्वामी अभिषेक ने कहा क्षेत्रवाद छोड़ बड़े हृदय के साथ राष्ट्र निर्माण हेतु युवाओं को आगे आना होगा।
युवा सम्मेलन में मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित केंद्रीय सूचना आयुक्त प्रो. एम श्रीधर आचार्यूलू ने कहा कि जयप्रकाश नारायण को लोग जितना बलिया में प्रेम करते हैं उससे कम मेरे प्रांत तेलंगाना में नहीं करते। जयप्रकाश नारायण ने देश को दिशा दी था। वह युवाओं के रोल मॉडल हैं। उन्होंने युवा चेतना के राष्ट्रीय संयोजक रोहित कुमार सिंह को जयप्रकाश की स्मृति में सम्मेलन आयोजित करने पर बधाई दी।
ई. अजय मिश्रा ने कहा कि जयप्रकाश देश के दूसरे गांधी हैं और देश की खोई हुई प्रतिष्ठा उनके दिखाए रास्ते पर चलकर ही प्राप्त किया जा सकता है।
समाज के अंतिम व्यक्ति को मुख्यधारा से जोड़ना ही रहा मुख्य: रोहित
युवा सम्मेलन की अध्यक्षता करते हुए युवा चेतना के राष्ट्रीय संयोजक रोहित कुमार सिंह ने कहा कि जयप्रकाश नारायण समाजवादी आंदोलन के प्रवर्तक थे। आजीवन जयप्रकाश नारायण ने समाज के अंतिम व्यक्ति को मुख्यधारा से जोड़ने के लिए कार्य किया। जेपी ग़रीबों के हिमायती थे। कहा कि बलिया क्रांति भूमि है जिस तरह तीर्थ के लिए मक्का-केदारनाथ जाना आवश्यक है उसी तरह सामाजिक कार्यकर्ताओं के लिए बलिया तपोभूमि है।
बलिया से शुरू हुए युवा सम्मेलन को युवा चेतना द्वारा पूरे देश में अब राज्य स्तर पर आयोजित किया जाएगा। सिंह ने कहा कि देश की आजादी के समय भी जनता रोटी, कपड़ा और मकान के लिए परेशान थी और आज भी जनता की वही स्थिति है। युवा सम्मेलन में भारी संख्या में उपस्थित युवाओं से रोहित सिंह ने अपील किया की अब संगठित होने की आवश्यकता है।
परिवारवाद के ख़िलाफ़ आजीवन संघर्ष करने का प्रण करने वाले जेपी के अनुयायियों ने उनके सिद्धांतों को भूला दिया। कहा कि जब तक जीवित हैं तब तक जयप्रकाश नारायण, चंद्रशेखर, राजनारायण के सिद्धांतों पर चलने का प्रयास करूंगा।