जिला भारोत्तोलन संघ की ओर से लक्सा के मिसिर पोखरा में ओलंपिक में मीराबाई चानू के पदक जीतने पर जश्न मनाया गया। वेटलिफ्टरों ने कहा कि काशी की बेटियां भी ओलंपिक में कमाल कर सकती हैं, बशर्ते बेहतर संसाधन और सुविधा मिले तो। जिले में राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय की एक दर्जन महिला वेटलिफ्टर हैं, जो बीस साल से भी पुराने उपकरणों से अभ्यास कर रहीं हैं। लेकिन कोच और संसाधनों के अभाव में ओलंपिक की दहलीज तक नहीं पहुंच पातीं।
यूथ कॉमनवेल्थ सहित सात बार राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में पदक जीत चुकीं वेटलिफ्टर पूर्णिमा पांडेय का कहना है कि बनारस में प्रतिभाएं तो बहुत हैं, लेकिन भारोत्तोलन खेल से जुडे़ उपकरण, कोच और खुराकी की समस्या के कारण यहां के बेटियां ज्यादा आगे नहीं जा पातीं। एशियन चैंपियनशिप की रजत पदक विजेता गौरी पांडेय का कहना है कि भारोत्तोलन में ज्यादातर गरीब तबके ही खिलाड़ी हिस्सा लेते हैं। इनके परिजन प्रतिदिन 500 से 700 रुपये की खुराकी का खर्च नहीं उठा पाते। जिला भारोत्तोलन संघ के सचिव चंद्र मोहन शुक्ला ने बताया कि जिले में मात्र दो प्रशिक्षण केंद्र लक्सा और सिगरा स्टेडियम में है, लेकिन यहां खेल उपकरण पर्याप्त नहीं हैं। एक आधुनिक उपकरणों और अनुभवी कोच युक्त प्रशिक्षण केंद्र की जरूरत है।
स्टेडियम में भारोत्तोलन उपकरण तो हैं, लेकिन अभी इसके लिए निदेशालय से किसी कोच की नियुक्ति नहीं हुई। इससे सिगरा स्टेडियम में फिलहाल प्रशिक्षण की सुविधा नहीं है।
- आरपी सिंह, क्षेत्रीय क्रीड़ा अधिकारी