फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

CBSE 10th Result : ये हैं वाराणसी के टॉपर्स, जानिए इनकी जुबानी, सफलता की कहानी

Wed, 30 May 2018 12:10 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
विज्ञापन
सुष्मिता सेन,शिवांगी यादव,अर्पित गर्ग - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन
सीबीएसई दसवीं का परिणाम कॅरियर का पहला बड़ा मंच है और यहां की कामयाबी आने वाले समय की तकदीर बनाती है।
विज्ञापन


शाबास टॉपर्स...। इस कामयाबी के मायने बस अंकों के गणित तक सीमित नहीं, बल्कि यह भविष्य के प्रति उम्मीद जगाती है। एक आस बंधाती है कि मेधा को सही मौका मिले तो वह अपनी लगन और मेहनत से सफलता की नई इबारत रचेगी। सीबीएसई दसवीं का परिणाम कॅरियर का पहला बड़ा मंच है और यहां की कामयाबी आने वाले समय की तकदीर बनाती है। रिजल्ट आते ही टॉपर्स के घरों में जश्न का माहौल है। मां-बाप को अपने बच्चों पर नाज है, जिन्होंने अपनी मेहनत और लगन से उन्हें गौरवान्वित किया और बच्चों को अपने मां-बाप पर, जिन्होंने उनके सपनों को न सिर्फ अपना बनाया बल्कि हर कदम साथ रहकर उन्हें कामयाबी के जहां में पंख पसार कर उड़ने का हौसला भी दिया और आसमान भी। 

पापा हैं रोल मॉडल, बनना है डॉक्टर  
वाराणसी में सर्वाधिक अंक हासिल कर टॉप करने वाली सुष्मिता अपने पापा डॉ. पीआर सेन को अपना रोल मॉडल मानती हैं और डॉक्टर बनना चाहती हैं। डॉ. पीआर सेन बीएचयू में ही मेडिसिन विभाग में डॉक्टर हैं। मौजूदा वक्त में वो मेडिकल अफसर भी हैं।
विज्ञापन


मां मीताली सेन बीएचयू के पर्यावरण एवं धारणीय विकास संस्थान में सहायक प्रोफेसर हैं। बेटी की इस सफलता पर दोनों निहाल हैं। सुष्मिता कहती हैं कि ‘मेरी सफलता का श्रेय मेरे मम्मी-पापा के साथ मेरे शिक्षकों को जाता है।

स्कूल में जो नियमित तौर पर पाठ्यक्रम पढ़ाया जाता है, घर आकर उसका रिवीजन अच्छे मार्क्स लाने में काफी मदद करता है।’ रोजाना चार से पांच घंटे पढ़ाई के साथ एक घंटे कथक की प्रैक्टिस उनकी रूटीन में शामिल हैं। फिर चाहे एग्जाम ही क्यों न हो, उनकी यह रूटीन जारी रहती है। सुष्मिता को कथक में सीसीआरटी स्कालरशिप भी मिलती है। 

मैंने कभी टाइमटेबल नहीं बनायाः शिवांगी यादव

शिवांगी यादव - फोटो : अमर उजाला
98.2 फीसदी के साथ वाराणसी के सेकेंड टॉपर  शिवांगी यादव ने कहा कि  कोई स्ट्रिक्ट टाइमटेबल नहीं। टाइमटेबल से पढ़ाई में सहूलियत से ज्यादा दबाव होता है इसलिए मैंने कभी टाइमटेबल नहीं बनाया।

हां, ये जरूर है कि सोने से पहले अगले दिन क्या पढ़ना है, ये जरूर निर्धारित करती थी और मेरी सफलता के पीछे इसने ज्यादा काम किया। सेकंड टॉपर शिवांगी फिलहाल आईआईटी जेईई क्रैक करना चाहती हैं।

कंप्यूटर साइंस में इंजीनियरिंग कर वो टेक्नालॉजी के जरिये समाज को कुछ देना चाहती हैं। खास तौर पर किसानों को। शिवांगी के पिता प्रो. जनार्दन यादव बीएचयू में ही कृषि वैज्ञानिक हैं।

मलाला यूसुफजई को अपना आदर्श मानने वाले शिवांगी कहती हैं कि कुछ बनकर वो अगर समाज के किसी वर्ग को कुछ देना चाहती हैं तो वो किसान हैं। मां शशिकला यादव होम मेकर हैं। शिवांगी को क्विज का शौक है और वो बॉर्नविटा क्विज कांटेस्ट की नेशनल फाइनलिस्ट भी रह चुकी हैं। 
 

कंप्यूटर साइंस से करना है इंजीनियरिंग

अर्पित गर्ग - फोटो : अमर उजाला
वाराणसी के सेकंड टॉपर अर्पित गर्ग ने कहा कि कम से कम 97 फीसदी अंक की उम्मीद की थी। परिणाम आया तो खुशी वाकई बयां करने वाली नहीं थी। ऐसा हो भी क्यों न आखिर अर्पित ने अपने इंजीनियरिंग के लक्ष्य की ओर एक कदम आगे बढ़ा दिया है।

अर्पित कंप्यूटर साइंस से इंजीनियरिंग करना चाहते हैं। उन्हें कोडिंग का बहुत शौक है। सॉफ्टवेयर और एप्लीकेशन डेवलपमेंट उनका शगल है। अर्पित का कहना है कि कोडिंग में मेरा बहुत मन लगता है और ऐसा सॉफ्टवेयर डेवलप करना चाहता हूं जो देश सेवा के काम आ सके।

अर्पित के पिता आशीष अग्रवाल बिजनेसमैन हैं। अर्पित का कहना है कि उनकी सफलता का श्रेय उनकी मां रुचि अग्रवाल और पापा आशीष अग्रवाल के साथ स्कूल के सभी टीचर्स को जाता है। एक निश्चित टाइमटेबल के साथ सात से आठ घंटे की पढ़ाई से मुझे ये सफलता मिली है। 
विज्ञापन

नौ साल बाद हुई अंकों की बरसात

निर्धारित समय से तीन घंटे पहले आया रिजल्ट - फोटो : अमर उजाला
सीबीएसई बोर्ड की दसवीं की परीक्षा में करीब नौ साल बाद अंकों की बरसात हुई। इस साल एक बार फिर से दसवीं में विद्यार्थियों को अंक मिले, टॉपर्स घोषित किए गए। इसे मेधावियों ने सराहा भी। उनका साफ कहना था कि सीजीपीए से बेहतर अंक हैं। हमें पता चलता है कि हमने कितना स्कोर किया है जबकि सीजीपीए में हम खुद को जज नहीं कर पाते हैं। 

दसवीं बोर्ड में छात्र-छात्राओं के तनाव को कम करने के लिहाज से सीबीएसई ने ग्रेडिंग व्यवस्था कर दी थी। विद्यार्थियों को सीजीपीए में ग्रेड मिला करते थे लेकिन 2017-18 से इस व्यवस्था को खत्म कर दिया गया। मंगलवार को परिणाम सबके सामने थे।

जो टॉपर थे उन्होंने अंक, पर्सेंटेज की इस व्यवस्था को सराहा। सनबीम स्कूल के अनंत बर्मन ने कहा कि अंकों की व्यवस्था सीजीपीए से बेहतर है। सुयश तिवारी का कहना था कि इससे हमें अपने एक्चुअल मार्क्स का पता चलता है जबकि सीजीपीए में हम खुद को जज नहीं कर पाते थे।

शलेवा सिंह ने कहा कि सीजीपीए की बस एक चीज अच्छी थी कि इससे छात्र-छात्राओं के फर्क को कम किया था लेकिन अंकों की व्यवस्था ज्यादा बेहतर है। प्रियांशी सिंह का कहना है कि अंकों से हम खुद को आंक सकते हैं। बोर्ड की ये पहल अच्छी है। 
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें