नागरिकों को शुद्ध पानी मुहैया कराने के लिए पांच सौ करोड़ से अधिक की भूमिगत पेयजल पाइप लाइन में गड़बड़ी सामने आने पर पाइप बिछाने वाली कंपनी मेघा इंजीनियरिंग पर मुकदमा दर्ज कराने का आदेश दे दिया गया है।
सूबे के विधि, न्याय, सूचना, खेल राज्य मंत्री डा. नीलकंठ तिवारी ने मंगलवार को कमिश्नरी सभागार में बुनियादी समस्याओं के बाबत अधिकारियों एवं जनप्रतिनिधियों के साथ बैठक में निर्देश दिया। उन्होंने कंपनी को ब्लैक लिस्टेड करने का भी निर्देश के साथ ही दो टूक कहा कि घटिया काम करने वाले बख्शे नहीं जाएंगे।
सिस वरुणा योजनान्तर्गत घरों के नलों में पेयजलापूर्ति सुनिश्चित कराने में कोई प्रगति नहीं होने पर विभागीय अभियंता की जमकर क्लास ली। जलनिगम के अधिशासी अभियंता के यह बताने पर की ओवरहेड टैकों में पानी तो भर लिया जा रहा है, लेकिन बिछाई गई पाइप लाइन जगह-जगह क्षतिग्रस्त होने के कारण टेस्टिंग नही हो पा रही है।
इस पर नाराज मंत्री ने अभियंता के चेताया कि अफसर आश्वासन देना बंद करें, जमीन पर काम दिखना चाहिए। लगातार निर्देश के बाद भी शहर में 40 प्रतिशत आबादी को समुचित तरीके से पेयजल आपूर्ति नहीं हो पा रही है और सीवर की समस्या बनी हुई है।
जलनिगम, नगर निगम एवं जलकल के अधिकारियों को अपनी कार्य संस्कृति में बदलाव लाने की नसीहत दी। समस्याओं के समाधान के लिए माइक्रोलेवल पर मानीटरिंग करने के लिए वार्ड स्तर पर बनाई गई कमेटी की भी मानीटरिंग के लिए डीएम को निर्देशित किया।
आगामी 20 अगस्त को नगर निगम के सभी पांचों जोनल कार्यालयों पर पेयजल एवं सीवर जैसी जनसमस्याओं के सुनवाई के लिए विशेष कैंप लगाने को कहा। बैठक में मेयर रामगोपाल मोहले, उत्तरी से विधायक रवींद्र जायसवाल, विधायक कैंट सौरभ श्रीवास्तव, कमिश्नर नितिन रमेश गोकर्ण, डीएम योगेश्वर राम मिश्र, नगर निगम, जलसंस्थान, गंगा प्रदूषण नियंत्रण इकाई एवं जलनिगम के अधिकारियों सहित अन्य विभागीय अधिकारी तथा मंत्री के प्रतिनिधि मौजूद थे।