अपर पुलिस अधीक्षक दुर्गा प्रसाद तिवारी ने बताया कि वर्ष 2014 में दोनों स्थानीय लोगों की सहायता से पासपोर्ट व अन्य दस्तावेज बनाने में आरोपी हैं। इनके रहने की पुष्टि नहीं हो रही है। इस मामले में साक्ष्यों के आधार पर जांच की जा रही है। किसी की संलिप्ता पाई जाती है तो उनके खिलाफ कार्रवाई होगी। जिले के शहर से लेकर गांवों में रहने वाले बाहरियों के सत्यापन का कार्य होगा।
बलिया जिले से रोहिंग्या के तार जुड़ने के बाद पुलिस व खुफिया विभाग अलर्ट हो गई है। शहर से लेकर कस्बों की घनी आबादी में वर्षो से रहकर फल, कपड़ा व फेरी का काम करने वालों में खलबली मची है। ज्यादा किराए के लालच में मकान मालिक बिना पहचान पत्र के इन्हें कमरा देने के साथ पूरा संरक्षण देते हैं।
राजनीतिक लाभ के लिए चुनाव लड़ने वाले लोग अवैध तरीके से मतदाता कार्ड से लेकर अन्य पहचान पत्र तक बनवा देते हैं। पुलिस जांच करेगी तो तमाम लोगों पर गाज गिरेगी। एक वर्ग विशेष मोहल्लों में इनकी आबादी ज्यादा है। कुछ वर्ष पूर्व एनआरसी लागू होने की खबर पर इनमें खलबली मची थी। गोपनीय विभाग भी कई बार शासन को बांग्लादेशियों की आशंका जता चुकी है।