पुलिस महकमे में तैनात पिता की मौत के बाद पीएसी में मृतक आश्रित कोटे में नियुक्त आरक्षी बेटे ने वास्तविक तथ्यों को छुपा कर पुलिस उप निरीक्षक के पद की भर्ती प्रक्रिया को पूर्ण कर नियुक्ति पाने का प्रयास किया। पुलिस अधीक्षक (ग्रामीण) की जांच के बाद मृतक आश्रित कोटे का लाभ लेने के आरोपी के खिलाफ कैंट थाने में धोखाधड़ी का मुकदमा दर्ज किया गया है।
बलिया के सहरोजा पूरब टोला निवासी सहजानंद यादव की मौत के बाद उनके बेटे चंद्र प्रताप यादव ने मृतक आश्रित सेवायोजन नियमावली के अंतर्गत पीएसी में आरक्षी के पद पर नियुक्ति पाई थी। नौकरी में रहते हुए चंद्र प्रताप ने उपनिरीक्षक के पद पर नियुक्ति प्राप्त करने के लिए 14 जून 2018 को वाराणसी में आहस्ताक्षर युक्त प्रपत्र भरा। उसमें राज्य व केंद्र सरकार में नियुक्ति से पूर्व की सेवायोजित होने की जानकारी वाले कॉलम में गलत जानकारी भरकर नियुक्ति का लाभ प्राप्त कर नियमावली का खुला उल्लंघन किया।
इसके साथ ही जानबूझकर तथ्यों को छुपा कर और विभाग को गुमराह करते हुए उप निरीक्षक के पद पर कार्यभार ग्रहण किया। जानकारी के बाद 36 बटालियन पीएसी रामनगर के सेनानायक के द्वारा जब जांच की गई तो आरक्षी के द्वारा की गई धोखाधड़ी सामने आई।
पुलिस महानिरीक्षक वाराणसी परिक्षेत्र के आदेश पर हुई जांच की रिपोर्ट और एसएसपी के आदेश पर पुलिस अधीक्षक ग्रामीण मार्तंड प्रकाश सिंह की जांच रिपोर्ट के आधार पर आरक्षी/उप निरीक्षक चंद्र प्रताप यादव के खिलाफ कैंट थाने में धोखाधड़ी का मामला दर्ज कर जांच शुरू की गई है।