फ्लाईओवर हादसे के बाद वैकल्पिक मार्ग के लिए माल गोदाम की सड़क को बनाया जा रहा है ।
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सेतु निगम के अधिकारियों ने जिला प्रशासन से सिफारिश की है कि लहरतारा-कैंट मार्ग को नो स्टापेज और नो ओवरटेकिंग जोन बनाया जाए। ताकि निर्माण कार्य के दौरान चौकाघाट फ्लाईओवर पर हादसे की पुनरावृत्ति न होने पाए।
इसके लिए सेतु निगम के अधिकारियों ने पूरे निर्माण कार्य क्षेत्र के साथ फुलवरिया फोरलेन निर्माण कार्य का निरीक्षण किया। अब सेतु निगम को मुंबई टीम से आई सेफ्टी टीम की सर्वे रिपोर्ट का इंतजार है।
इसी रिपोर्ट पर आगे का निर्माण कार्य शुरू कराया जाएगा। काम शुरू करने से पूर्व अधिकारियों ने बारीकी से अध्ययन किया। अधिकारियों का मानना है कि हादसे वाले मार्ग को चालू करने से पूर्व हर पहलू पर विचार किया जा रहा है।
इस इलाके में वाहनों को जाम की समस्या से निजात दिलाने के लिए कुछ महत्वपूर्ण बदलाव करने की जरूरत है। नो स्टापेज और नो ओवरटेकिंग जोन बन जाएगा तो कोई वाहन यहां रुकेंगे नहीं और न ही दूसरे वाहन को ओवरटेक करेंगे। इस काम में यातायात विभाग की मदद ली जाएगी।
सेतु निगम के महाप्रबंधक एके श्रीवास्तव ने कहा कि निरीक्षण करके रिपोर्ट तैयार की जा रही है। इसे जिला प्रशासन को भेजा जाएगा। सेफ्टी और ट्रैफिक मैनेजमेंट की टीम अध्ययन कर रही है। उसकी रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्ययोजना बनाई जाएगी।
12 दिन में केवल तीन पीड़ितों का लिया गया बयान
बीम के नीचे दबी गाड़ियां
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फ्लाईओवर हादसे के ठीक बाद प्रशासन की ओर से कराई जा रही है मजिस्ट्रियल जांच महज कागजी खानापूर्ति ही साबित हो रही है। यही कारण है कि हादसे के 12 दिन बाद भी रफ्तार नहीं पकड़ पाई है। अब तक तीन घायलों के अलावा सेतु निगम के अधिकारियों के बयान लिए गए हैं। अब तक प्रशासन प्रत्यक्षदर्शियों, प्रशासनिक अधिकारियों, पुलिस, एनडीआरएफ सहित अन्य लोगों से संपर्क भी नहीं कर पाया है।
15 मई को फ्लाईओवर की बीम गिरने से 15 लोगों की मौत के मामले में प्रशासन ने अपनी गर्दन बचाने के लिए एडीएम एफ को मजिस्ट्रियल जांच सौंपी और तीन दिन में रिपोर्ट मांगी थी। एडीएम ने जांच पूरी करने के लिए 15 दिन का अतिरिक्त समय मांगा।
मगर, इसके बाद जांच की रफ्तार सुस्त हो गई और तीन घायलों व सेतु निगम के अधिकारियों के बयान दर्ज करने के बाद फाइल ठंडे बस्ते में डाल दी गई है। नियमानुसार हादसे के बाद मौके पर पहुंचे अलग अलग विभागों के अधिकारी, कर्मचारी, बचाव कार्य में लगे लोग सहित इससे जुड़े अन्य लोगों के बयान और घटना से जुड़ी जानकारी लेनी है।
मगर, घटना से जुड़े अन्य लोगों से संपर्क का प्रयास नहीं किया जा रहा है। मजिस्ट्रियल जांच पूरी करने के लिए तीन जून का समय है, ऐसे में सात दिन में जांच पूरी करना चुनौती है।
जिलाधिकारी योगेश्वर राम मिश्र का कहना है कि फ्लाईओवर हादसे की मजिस्ट्रियल जांच में समयसीमा नहीं बढ़ाई जाएगी। हर हाल में जांच रिपोर्ट तय समय पर देनी होगी।