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Varanasi News : परिवार में कैंसर पीड़ित, जांच में दूसरे सदस्य भी निकले पॉजिटिव; पांच लोगों में जीन की पहचान

Thu, 24 Oct 2024 09:09 AM IST
अमन विश्वकर्मा हिमांशु अस्थाना, अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।

सार

Varanasi News : परिवार के लोगों को खुद कैंसर पीड़ित होने की भनक तक नहीं लगी थी। जांच में पता चलते ही सभी परेशान हो गए। डॉक्टर के कहने पर सभी सदस्यों ने अपनी स्क्रीनिंग करवाई थी। जांच में कैंसर होने से पहले ही शुरुआती लक्षणों का पता चल गया। 
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BHU Hospital - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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बीएचयू में पांच लोगों में पनप रहे कैंसर को पहले स्टेज में पहुंचने से पहले ही पहचान लिया। इन लोगों के परिवार या पीढ़ी के किसी सदस्य को कैंसर हुआ था, इसलिए इन्हें भी भविष्य में कैंसर हो सकता है, इसकी भनक तक नहीं थी। परिवार में एक सदस्य को कैंसर का पता चलते ही दूसरे सदस्यों ने अपनी स्क्रीनिंग कराई थी। 

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अलग-अलग परिवार के कुल 25 लोगों ने जीन की जांच कराई। ऐसे लोगों में कैंसर कारक जीन म्यूटेशन का पता चला। जो कुछ समय में कैंसर का रूप ले लेता है। शुरुआती स्टेज में ही कैंसर की पहचान हो गई। अमूमन, कैंसर का पता तीसरे या लास्ट स्टेज में ही चलता है। क्योंकि, कैंसर के ट्यूमर का दर्द तीसरे स्टेज में ही पता चलता है। लेकिन, बीएचयू में लोगों के अंदर कैंसर होने से पहले ही उसके कारकों को पता चला गया।

ये काम जेनेटिक फॉर डिसऑर्डर के प्रमुख डॉ. अख्तर अली, डॉ. सुनील चौधरी और उनकी रिसर्च टीम कर रही है। कैंसर पर कंट्रोल करने के लिए भारत सरकार को प्रोजेक्ट का प्रस्ताव भी दिया है। डॉ. अली ने बताया कि कैंसर का पता लगाने के लिए शरीर के 22 हजार जीन की जांच की गई। कंप्यूटर में हर एक रोगी का 15-15 जीबी डेटा तैयार किया गया। 
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बायो-इंफाॅर्मेटिक्स (बड़ी मात्रा में जैविक डेटा को इकट्ठा कर उसका विश्लेषण करना) की मदद से इसकी जांच की गई। इसे पूरा होने में करीब 25-30 दिन लगे। अध्ययन के बाद रिपोर्ट आई तो पांच लोगों में कैंसर के जीन का पता चला। फिर, डॉक्टर से इनकी काउंसिलिंग कराई गई।

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दो तरह के होते हैं कैंसर के जीन
डॉ. अली ने कहा कि कैंसर के जीन दो तरह के होते हैं, प्रोटो ओंको जीन और ट्यूमर सप्रेशर जीन। इसमें से एक शांत और दूसरे को एक्टिव रहना चाहिए। ट्यूमर सप्रेशर जीन कैंसर को दबाता है और प्रोटो ओंको जीन कैंसर को बढ़ाता है। हर एक में 100 प्रोटो ओंको जीन हैं, जो कि हजारों साल से शरीर में हैं। इसे शांत रहना चाहिए। यदि ये एक्टिवेट होकर प्रोटो से ओंको में बदल गए तो कैंसर हो जाएगा। इस जांच में इन दोनों ही जीन को सीक्वेंस करके देखते हैं कि कहीं इसमें गड़बड़ी छिपी तो नहीं है।

जीन को रिकवर करने वाला ही डैमेज
किसी ने स्मोकिंग की और जीन डैमेज हो गया, लेकिन जब जीन को रिकवर करने वाली मशीनरी ही खराब है तो वहां कैंसर विकसित हो जाता है। हमें इसी डैमेज जीन की पहचान करनी है। फिर, इसे तेजी से बढ़ने से रोकना है या स्पीड को स्लो करना है। 
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