आजादी का अमृत महोत्सव के तहत केंद्रीय अंतरस्थलीय मात्स्यिकी अनुसंधान संस्थान, बैरकपुर (पश्चिम बंगाल) की ओर से मत्स्य रैंचिंग, डॉल्फिन एवं जल संरक्षण और जन जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन अस्सी घाट पर किया गया। इस दौरान केंद्रीय मंत्री ने किसानों की तरह लोन और बीमा की सुविधा के लिए क्रेडिट कार्ड के बारे जानकारी देते सभी मछुआरों को लेने के लिए प्रेरित किया।
केंद्रीय अंतरस्थलीय मात्स्यिकी अनुसंधान संस्थान के निदेशक और ‘नमामि गंगे’ परियोजना के प्रधान अन्वेषक डॉ. बसंत कुमार दास ने स्थानीय मछुआरों को गंगा नदी में प्राप्त मछलियों और डॉल्फिन के स्वास्थ्य और संरक्षण के पारिस्थितिक विषयों के बारे में जागरूक किया गया। इस दौरान डॉ. जेके जेना, उप महानिदेशक (मत्स्य विज्ञान) आईसीएआर, जिलाधिकारी कौशल राज शर्मा, पुलिस कमिश्नर ए सतीश गणेश ने सभा को संबोधित किया। उप महानिदेशक जेना ने मछलियों के संरक्षण के साथ ही समाज की भागीदारी पर जोर दिया।
अस्सी घाट पर मछलियों के छोड़ने के बाद केंद्रीय मंत्री आराजीलाइन के शाहंशापुर स्थित राजकीय पशुधन फार्म का भी दौरा किया, जहां गंगा तीरि गाय की पूजा करने के बाद सभा को संबोधित करते हुए किसानों को कई योजनाओं के बारे में जानकारी दी। केंद्रीय मंत्री देश के पहले गोबर गैस प्लांट भी पहुंचे, जहां गैस और कंपोस्ट खाद तैयार होने की प्रक्रिया के बारे जानकारी ली।
काशी विश्वनाथ धाम का स्वरूप देख मन हुआ आह्लादित
सपरिवार काशी विश्वनाथ का दर्शन करने के बाद केंद्रीय मंत्री ने कहा कि धाम को देखकर मन आह्लादित हो गया है। प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संसदीय क्षेत्र वाराणसी में नमामी गंगे प्रोजेक्ट के तहत मां गंगा की सेवा करने का जो बीड़ा उठाया है उसका असर देखने को मिल रहा है।
केंद्रीय मंत्री चौक स्थित लक्ष्मी चाय वाले की दुकान पर पहुंचे, जहां उन्होंने ब्रेड-मक्खन सहित चाय का लुत्फ लिया और बनारसी पान भी जमाया। उन्होंने कहा कि काशी के इस परंपरागत बाजार में आम लोगों के बीच सड़क पर खड़े होकर चाय और मक्खन टोस्ट का आनंद अद्भुत है। क्षेत्रीय लोगों से बातचीत के दौरान उन्होंने बनारस की बदलती तस्वीर के बारे में भी चर्चा की और दुकानदारों से विश्वनाथ धाम निर्माण के पश्चात व्यापार पर सकारात्मक असर की भी जानकारी ली।