गुड्स सर्विस टैक्स कानून नियमों में शहर के व्यापारी उलझ गए हैं। जीएसटीआर-1 दाखिल करने के अंतिम दिन बृहस्पतिवार को करीब 50 फीसदी कारोबारियों का आईटीसी क्लेम नहीं जमा हो सका। रिटर्न दाखिल करने को लेकर सीए और अधिवक्ताओं को भी काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा। कर अधिवक्ताओं के अनुसार अंतिम दिन होने के चलते सर्वर पर काफी लोड रहा। करीब 50 फीसदी कारोबारियों का आईटीसी क्लेम फंस गया है।
जीएसटी में नए कानून के तहत अब हर माह की 11 तारीख तक जीएसटी में पंजीकृत कारोबारियों को जीएसटीआर-वन दाखिल करना अनिवार्य कर दिया गया है। ऐसा नहीं करने वाले कारोबारियों की आईटीसी क्लेम फंस जाएगी। शहर के सीए जय प्रद्धवानी बताते हैं कि व्यापारी यदि जीएसटीआर-वन समय से दाखिल नहीं करता है तो जिन व्यापारियों को उसने माल बेचा था, उन्हें इनपुट टैक्स क्रेडिट यानी आईटीसी का लाभ नहीं मिल पाएगा। जीएसटीआर-वन दाखिल करने की अंतिम तिथि हर माह की अगली 11 तारीख रखी गई है। जिन व्यापारियों की वार्षिक बिक्री 2019-20 या 2020-21 के दौरान 1.50 करोड़ से ज्यादा है, उन्हें जनवरी माह की बिक्री से संबंधित सारी जानकारी जीएसटीआर-वन 11 फरवरी तक दाखिल करना अनिवार्य है अन्यथा जिन व्यापारियों को उसने माल बेचा है, उन्हें आईटीसी से वंचित रहना पड़ेगा। वहीं जिनकी वार्षिक बिक्री 1.50 करोड़ से अधिक है और वार्षिक बिक्री 1.50 करोड़ से कम है, उनके लिए अंतिम तिथि अगले माह की 13 तारीख तय की गई है।
जीएसटी के नए कानून व्यवस्था से व्यापारियों में नाराजगी
अखिल भारतीय उद्योग व्यापार मंडल के महानगर अध्यक्ष राकेश जैन की अध्यक्षता में व्यापारियों ने बृहस्पतिवार को बैठक की। इस दौरान व्यापारियों ने मांग किया कि जीएसटी कर प्रणाली को केंद्र सरकार वापस लें। 26 फरवरी को भारत बन्द को समर्थन देने का व्यापारियों ने मन बनाया। इस अवसर पर प्रदेश उपाध्यक्ष शेषपाल गर्ग, महामंत्री संजय जायसवाल, कार्यकारी महामंत्री राम भरत ओझा, रमेश केसरी, अजय सिंह, मंत्री राजू बाजोरिया, अनिल जैन मौजूद रहे।