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अमर उजाला समृद्धि संवाद में उत्साहित दिखे कारोबारी, नई उम्मीदों से जुटे त्योहार की तैयारी में

Wed, 18 Sep 2019 01:18 AM IST
Trainee Trainee न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
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अमर उजाला समृद्धि संवाद - फोटो : अमर उजाला
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सात वार और नौ त्योहार वाली काशी में त्योहारी सीजन को लेकर रिटेल कारोबारी बेहद उत्साहित हैं। उनका मानना है कि अक्तूबर महीना उम्मीद और नए अवसर लेकर आएगा। इसकी तैयारियों के लिए यही सही वक्त है। उपभोक्ता को केंद्र में रखकर रिटेल व्यवसायी अभी से प्रचार प्रसार और योजना बनारकर उस पर काम करना शुरू कर दें।

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मंदी का दौर बीत चुका है और अच्छे दिन दस्तक की तैयारी में हैं। अमर उजाला कार्यालय में मंगलवार को समृद्धि संवाद कार्यक्रम के दौरान कारोबारी, व्यापारी, चार्टर्ड अकाउंटेंट और अर्थशास्त्री के बीच मंथन से निकलकर आए उक्त सकारात्मक विचार पर सभी सहमत दिखे। दीवाली और सहालग के महीने को लेकर ढेरों उम्मीद जताई गई। समृद्धि संवाद के दौरान ऑन लाइन कारोबार, प्लास्टिक मनी, जीएसटी और पितृ पक्ष में मंदी को लेकर विस्तार से चर्चा हुई।

वक्ताओं ने कहा कि पिछले कुछ महीने से व्यापार में सुस्ती छाई है। इसका कारण ऑन लाइन बाजार को बताया। व्यापारियों ने कहा कि ऑफर और आसान डिलेवरी के चलते लोग घर बैठे शॉपिंग कर 
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ले रहे हैं और बाजार तक नहीं पहुंच रहे हैं। वहीं प्लास्टिक मनी से खरीदारी पर अभी भी लोगों का अपेक्षित विश्वास न होना भी व्यवसाय में मंदी का कारण बताया गया। जीएसटी के बदलते नियमों से भी व्यापार में आ रही समस्या को 
रेखांकित किया।

इस सब के बावजूद त्योहारों के शुरू होने वाले मौसम में अच्छे व्यापार की उम्मीद जताई गई। ज्यादा से ज्यादा उपभोक्ता बाजार पहुंचे और उत्कृष्ट उत्पादों की खरीदारी करें, इसके लिए अभी से इसके लिए कसरत शुरू करने का आह्वान किया गया। प्रचार प्रसार के साथ ही अच्छे आफर, उत्कृष्ट उत्पादों तक लोगों की आसान पहुंच बनाने का प्रयत्न शुरू करने को कहा गया। वहीं ऑन लाइन बाजार पर नियंत्रण लगाने और जीएसटी की दरों में कमी लाने की भी मांग उठी।

कार्यक्रम में जित्तन चौधरी, अनुज केसरी, गिरीश पांडेय, अनंत भूषण, अशोक दूबे, एसपी यादव, परवेज हुसैन, विनोद सिंह मौजूद रहे।

यह करें उपाय

  • आन लाइन की तरह उत्पाद नहीं तो कम से कम प्रचार प्रसार के माध्यम से लोगों तक पहुंचाएं उत्पाद या प्रतिष्ठान की खास बात
  • असंगठित के बजाए व्यापार को संगठित बनाएं- उत्पाद के बजाए उपभोक्ता की रुचि और सुविधा को केंद्र बिंदु बनाएं



खुद के  उत्पाद को बनाए ब्रांड

  • प्रतिष्ठान में ग्राहकों के लिए बनाएं एक व्यवस्था
  • परंपरागत के बजाए समय के साथ लाएं बदलाव

 

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ये कहते हैं व्यापारी

‘पितृ पक्ष की हिंदू धर्म में मान्यता है अन्य संप्रदाय से जुड़े उपभोक्ताओं को हम योजनाबद्ध तरीके से अपने प्रतिष्ठान तक ला सकते हैं। इसके लिए सकारात्मक सोच की जरूरत है।’ अजित सिंह बग्गा, अध्यक्ष, वाराणसी व्यापार मंडल

 
‘जीएसटी में उलझकर व्यापारी व्यापार नहीं कर पा रहा है। इसके सरलीकरण के साथ ही फैसिलिटेशन सेंटर की जरूरत है जहां आसानी से लोगों की समस्या का समाधान हो सके।’ प्रमोद अग्रहरि, महामंत्री, वाराणसी व्यापार मंडल


‘2016 से व्यापार में लगातार गिरावट आई है।कभी नोटबंदी तो कभी जीएसटी ने छोटे व्यापारियों को नुकसान पहुंचाया। सरकार को इस ओर ध्यान देना होगा।’ विशाल मेहरा, नगर अध्यक्ष प्रतिनिधि व्यापार उद्योग मंडल


‘अगर सरकार की इच्छा के अनुरूप व्यापारियों को बैंक से सहयोग मिलने लगे तो आधी समस्या ऐसे ही दूर हो जाए पर लोन केवल सेटिंग वाले लोगों को ही मिलता है।’ जय निहलानी, अध्यक्ष युवा काशी बिस्कुट एंड कंफेक्शनरी व्यापार मंडल

‘अनिश्चितता का दौर चल रहा है। तकनीकी का उपयोग तेजी से बढ़ा है। ऑटोमोबाइल सेक्टर हो कोई भी क्षेत्र खुद को अपडेट रखना होगा।’ श्याम केशरी, पेट्रोलियम डीलर्स एसोसिएशन‘बैंकों से जो भी आर्थिक सहयोग दिया जाता है उसमें से मात्र चार प्रतिशत ही व्यापारियों तक पहुंचता है। व्यापारियों के लिए विशेष पैकेज देने पर सरकार को विचार करना होगा।’ अशोक जायसवाल, महामंत्री महानगर उद्योग व्यापार मंडल


‘ऑनलाइन शॉपिंग पर सरकार को लगाम लगाना होगा जिससे की रिटेल बाजार को बचाया जा सके और प्रतिस्पर्धा बनी रहे।’अनुभव मिश्रा, प्रोपेराइटर, एडवांस आईटी वर्ड ‘परिवर्तन प्रकृति का शाश्वत नियम है। व्यापार पर भी यही लागू होता है। हमें भी खुद को परिस्थितियों के अनुरूप ढालकर उसे आगे ले जाना होगा।’ जीएस नेवर, प्रोपेराइटर, हीरो इंडस्ट्री


‘गारमेंट्स पर जीएसटी की दरों में कमी लानी चाहिए। जीएसटी की दर पांच प्रतिशत की जाए या लग्जरियस गार्मेंट्स की सीमा दो हजार की जाए।’ मनीष गुप्ता, श्रीव्यापार मंडल पांडेयपुर ‘पेट्रो पदार्थों में वृद्धि जारी है। तेल की आवक में कमी नहीं आई है। महंगाई के चलते इसके प्रयोग में गिरावट आई है। सरकार को इसके लिए प्रयास करना होगा।’ विनोद सिंह, अध्यक्ष, पेट्रोलियम डीलर्स एसोसिएशन


‘पितृ पक्ष का व्यापार पर कोई खास असर नहीं पड़ा है। नई पीढ़ी खरीदारी के लिए यह सब नहीं देखती। उसे अगर कोई चीज पसंद है तो उसे तुरंत खरीद लेती है। ’ कुमार अग्रवाल, प्रोपराइटर, हर्ष गैस
‘पितृ पक्ष जैसे समय तो उपभोक्ताओं के लिए बेहतर अवसर लेकर आते हैं। इस दौरान उत्पाद की खरीद में छूट के साथ ही उत्कृष्टता की भी पूरी गारंटी होती है।’ अरुन रुस्तगी, सजावट फर्निशिंग,


‘59 मिनट में एक करोड़ तक लोन देने का दावा किया गया पर किसी को मिला नहीं। अगर बैंक से जुड़ी योजनाओं की जमीनी स्तर पर क्रियान्वयन हो तो परेशानी दूर हो जाए।’ विनय कुमार गुप्ता, अध्यक्ष मंडुवाडीह व्यापार मंडल


‘मंदी को लेकर बैठने से अच्छा है कि व्यापार को नई ऊंचाई तक कैसे ले जाया जाए, इसको लेकर प्रयास करना चाहिए। सकारात्मक सोच ही आगे ले जा सकती है।’ गौरी धानुका


‘मार्केट में समय के साथ ही कंपटीशन बढ़ता जा रहा है। जरूरत है खुद को अपडेट करने की। बदलाव ही खुद को बाजार में मजबूती से खड़ा रख सकता है।’ मुश्तफा नकवी, अप्लायड



‘नवंबर महीना उम्मीद लेकर आने वाला है। इसके लिए व्यापारी खुद को तैयार करें और परे उत्साह के साथ अपने व्यापार को नई ऊंचाई प्रदान करें।’ मनीष जायसवाल, ब्यूटी एंड जॉय


‘पितृ पक्ष सहित ऑफ सीजन में बैंक भी लोन इत्यादि पर कई ऑफर देती है। इसका उपभोक्ताओं को ज्यादा से ज्यादा लाभ उठाना चाहिए। ’राजन, रीजनल मैनेजर मार्केटिंग


‘बाजार में पिछले तीन सालों से मंदी छाई है। छोटे व्यापारियों पर इसका व्यापक असर पड़ा है। सरकार को इससे उबरने के लिए व्यापक कदम उठाने होंगे।’ इंद्रजीत सिंह, उपाध्यक्ष मंडुवाडीह व्यापार मंडल

क्या कहते हैं एक्सपर्ट

‘आज मोबाइल भी मोबाइल (ऑनलाइन शॉपिंग) से खरीदा जाता है। सिस्टम बदलने से ज्यादा जरूरी खुद को बदलना है। हमें अपने व्यापार को एडवांस और उपभोक्ता फ्रैंडली बनाना होगा’  सीए सुदेशना बासु, पूर्व चेयरपर्सन, आईसीएआई

‘जीएसटी लागू होने के बाद संगठित क्षेत्र के व्यापारी विकास कर रहे हैं। दिक्कत दो नंबर वालों को हो रही है। अब अंतिम उपभोक्ता तक पहुंच आसान हो गई है जिससे व्यापार में नई उम्मीदें जगी हैं।’  सीए अतुल सेठ, पूर्व अध्यक्ष आईसीएआई वाराणसी


‘उत्पाद नहीं ग्राहक को गंभीरता से लें। उसे व्यापार का केंद्र बनाएं। अब 4पी (प्लेस, प्रोडक्ट, प्रमोशन, प्राइस) नहीं बल्कि बदलते परिवेश के आधार पर ही व्यापार को ऊंचाई दी जा सकती है।’  प्रो. आलोक राय, एमबीए डिपार्टमेंट, बीएचयू
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