लाइब्रेरी में रखी किताबें
निजी प्रकाशकों की किताबें ज्यादा महंगी हैं। स्कूल प्रबंधन भी निजी प्रकाशकों की किताबें ही खरीदने पर जोर दे रहे हैं। निजी प्रकाशकों की किताबों के ऊंचे दाम का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इनकी प्री प्राइमरी की किताबें एनसीईआरटी की हाईस्कूल की किताबों से तीन गुना तक महंगी हैं। गुरुबाग के एक कारोबारी ने बताया कि इस बार निजी प्रकाशकों की किताबें 25 से 30 फीसदी तक महंगी हुई हैं। एनसीईआरटी में हिंदी की किताब 70 रुपये, अंग्रेजी की 80, गणित की 150, विज्ञान की 170 रुपये है, जबकि केजी में निजी प्रकाशक की हिंदी सुलेख की किताब 150, अंग्रेजी राइटिंग की किताब 135 और रीडिंग बुक 250 से 400 रुपये में मिल रही है।
फीस बढ़ोतरी से जेब पर बोझ
स्कूलों की फीस भी अभिभावकों की जेब पर भारी पड़ रही है। कई स्कूलों ने शैक्षणिक सत्र 2023-2024 के लिए फीस में बढ़ाई है। नए सत्र की दाखिला प्रक्रिया भी चल रही है। अभिभावकों से जो जानकारी मिली है, उसके मुताबिक स्कूलों ने औसतन आठ से 10 फीसदी तक फीस बढ़ाई है।
कौन सी किताब खरीदनी है, यह स्कूल ने निर्धारित किया है। एनसीईआरटी के साथ ही निजी प्रकाशकों की किताबें खरीदवाई जा रही हैं। बच्चों को पढ़ाना है तो स्कूल प्रशासन की बात माननी ही पड़ेगी। - विनीता मिश्रा, सुंदरपुर
बेटे का प्रवेश यूकेजी में हुआ है। स्कूल की लिस्ट में 10 से 11 किताबें हैं। इनकी कीमत लगभग पांच हजार रुपये है। स्टेशनरी लेना भी अनिवार्य है। - प्रदीप सिंह, लक्सा