फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

पढ़ाई पर महंगाई की मार: फीस-किताबें महंगी होने से बिगड़ा बजट, दुकानदारों ने बताया- क्यों बढ़ रहे दाम ?

Thu, 16 Mar 2023 02:40 PM IST
किरन रौतेला न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी

सार

स्कूलों की फीस भी अभिभावकों की जेब पर भारी पड़ रही है। कई स्कूलों ने शैक्षणिक सत्र 2023-2024 के लिए फीस में बढ़ाई है। नए सत्र की दाखिला प्रक्रिया भी चल रही है। अभिभावकों से जो जानकारी मिली है, उसके मुताबिक स्कूलों ने औसतन आठ से 10 फीसदी तक फीस बढ़ाई है।
विज्ञापन
स्कूल जाते बच्चे।
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

स्कूल फीस बढ़ने के साथ ही यूनिफार्म, जूते-मोजे व कॉपी-किताबें भी महंगी हो गई हैं। दाम में करीब 25 से 30 फीसदी तक बढ़ोतरी हुई है। इससे अभिभावक परेशान हैं। उनका कहना है कि महंगाई से बजट बिगड़ गया है। जिस दाम में हाईस्कूल की किताबें मिलती हैं, उतने में ही केजी की किताबें मिल रही हैं। शहर के स्टेशनरी संचालक कॉपी-किताब की महंगाई के पीछे की वजह भी बता रहे हैं। उनका कहना है कि कागज के दाम 50 की जगह 85 रुपये प्रति किलोग्राम हो गए हैं। कॉपी-किताब तैयार करने के लिए जरूरी कच्चे माल भी नहीं मिल रहे हैं। टैक्स भी ज्यादा लिया जा रहा है। कर्णघंटा के कारोबारी संदीप गुप्ता ने बताया कि कॉपी-किताबों के जो सेट पहले औसतन पांच से छह हजार रुपये में मिलते थे, वह इस बार सात से आठ हजार रुपये में बिक रहे हैं। निजी प्रकाशकों की जो किताबें 400 से 500 रुपये में मिल जातीं थीं, उनकी कीमत 600 रुपये तक पहुंच गई है।

विज्ञापन

 

लाइब्रेरी में रखी किताबें
निजी प्रकाशकों की किताबें ज्यादा महंगी हैं। स्कूल प्रबंधन भी निजी प्रकाशकों की किताबें ही खरीदने पर जोर दे रहे हैं। निजी प्रकाशकों की किताबों के ऊंचे दाम का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इनकी प्री प्राइमरी की किताबें एनसीईआरटी की हाईस्कूल की किताबों से तीन गुना तक महंगी हैं। गुरुबाग के एक कारोबारी ने बताया कि इस बार निजी प्रकाशकों की किताबें 25 से 30 फीसदी तक महंगी हुई हैं। एनसीईआरटी में हिंदी की किताब 70 रुपये, अंग्रेजी की 80, गणित की 150, विज्ञान की 170 रुपये है, जबकि केजी में निजी प्रकाशक की हिंदी सुलेख की किताब 150, अंग्रेजी राइटिंग की किताब 135 और रीडिंग बुक 250 से 400 रुपये में मिल रही है।
 
विज्ञापन

महंगाई। - फोटो : सोशल मीडिया
फीस बढ़ोतरी से जेब पर बोझ
स्कूलों की फीस भी अभिभावकों की जेब पर भारी पड़ रही है। कई स्कूलों ने शैक्षणिक सत्र 2023-2024 के लिए फीस में बढ़ाई है। नए सत्र की दाखिला प्रक्रिया भी चल रही है। अभिभावकों से जो जानकारी मिली है, उसके मुताबिक स्कूलों ने औसतन आठ से 10 फीसदी तक फीस बढ़ाई है।
कौन सी किताब खरीदनी है, यह स्कूल ने निर्धारित किया है। एनसीईआरटी के साथ ही निजी प्रकाशकों की किताबें खरीदवाई जा रही हैं। बच्चों को पढ़ाना है तो स्कूल प्रशासन की बात माननी ही पड़ेगी। - विनीता मिश्रा, सुंदरपुर

बेटे का प्रवेश यूकेजी में हुआ है। स्कूल की लिस्ट में 10 से 11 किताबें हैं। इनकी कीमत लगभग पांच हजार रुपये है। स्टेशनरी लेना भी अनिवार्य है। - प्रदीप सिंह, लक्सा
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें