कालीन उद्योग जगत का कहना है कि ड्रॉ-बैक तो पहले से ही लगातार कम हो रहा था, अब उसी को दूसरे रूप में देने की तैयारी का नाम भी निर्विक हो सकता है। हालांकि योजना की पूरी जानकारी अभी सामने आनी बाकी है।
जर्मनी में गत दिनों हुए डोमोटेक्स कालीन मेले में जिले की हैंडनॉटेड कालीनों को विदेशी मशीनमेड कालीनों से कड़ी टक्कर मिली है। तमाम कारोबारियों और निर्यातकों को अपेक्षाकृत ऑर्डर भी नहीं मिले। दूसरी ओर कारोबार की असलियत स्वीकार करने का साहस उद्योग जगत से जुड़े लोग नहीं कर पा रहे हैं। डोमोटेक्स से लौटे एक बड़े कालीन कारोबारी ने बताया कि कारोबार की आंतरिक हालत ठीक नहीं है। हैंडनॉटेड के कच्चे माल मशीन मेड की तुलना में महंगे आ रहे हैं।
इसके अलावा बीविंग पर भारी खर्च के चलते महंगे हो चुके भदोही के हैंडमेड कालीनों को सस्ते विदेशी मशीनमेड कालीनों के आगे कम तरजीह मिल रही है। इस तरफ सरकार को ध्यान देने की जरूरत है। वरना कारोबार पर असर पड़ना तय है। अब बजट में उद्योग जगत को लेकर वित्तमंत्री का ‘निर्मल मन’ दिखा है तो आस जग गई है। हालांकि व्यवसाय में इसका कितना और कैसा असर पड़ता है, यह समय बताएगा।