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सारनाथ से बोधगया तक गूंजा बुद्धं शरणं गच्छामि

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बुद्ध पूर्णिमा पर भगवान बुद्ध की उपदेश स्थली बुद्ध शरणं गच्छामि, संघम शरणं गच्छामि... मंत्र से गुंजायमान हो उठी। बौद्ध भिक्षुओं ने विश्व के कल्याण और महामारी की शांति के लिए मठ-मंदिरों में विधि विधान से पूजन किया।
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बुधवार को तथागत भगवान बौद्ध की धर्म उपदेश स्थली पर बुद्ध पूर्णिमा के दिन लॉकडाउन के कारण सन्नाटा पसरा रहा। बौद्ध भिक्षुओं ने अपने-अपने बौद्ध मठों एवं घरों में ही भगवान बुद्ध की पूजा करके विश्व कल्याण की कामना की। मूलगंध कुटी बिहार विहराधिपती व महाबोधि सोसायटी ऑफ इंडिया के संयुक्त सचिव सुमितानंद ने मंदिर में स्थित भगवान बुद्ध के धम्मचक्र प्रवर्तन मुद्रा में स्थापित मूर्ति के समक्ष धूप, पुष्प अर्पित करने के बाद धम्म सूत्र का पाठ किया।
बौद्ध भिक्षुओंने विश्व कल्याण एवं कोरोना महामारी से निजात पाने के लिए विशेष पूजन किया। संयुक्त सचिव ने बताया कि यह पूजा एक साथ भारत में स्थित सभी बौद्ध मंदिरों में हुई। बोधगया, कुशीनगर, श्रावस्ती, लखनऊ, कोलकाता, कौशांबी स्थित बौद्ध मंदिरों में एक साथ मंत्र उच्चारण कर विश्व की सुख, शांति एवं समृद्धि के लिए प्रार्थना की गई। बौद्ध उपासक रोहन, बौद्ध उपासिका प्रिया ने अपने पुत्र राजीव के साथ खीर दान किया।
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शाम को पूरे मंदिर प्रांगण को दीपों से सजा दिया गया, साथ ही बौद्ध भिक्षुओं ने मुलगंध कुटी विहार प्रांगण में स्थित बोधि वृक्ष के पास दीपदान कर धम्मचक्र प्रवर्तन सूत्र का पाठ किया। वहीं सारनाथ स्थित कंबोडियन मंदिर, थाई मंदिर, बर्मा मंदिर, जापानी मंदिर, श्रीलंकाई मंदिर, चीनी मंदिर में भी बुद्ध पूर्णिमा सादगी के साथ मनाई गई।
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