सांसद अतुल राय (फाइल फोटो)
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अदालत ने समस्त साक्ष्यों के विश्लेषण के बाद कहा कि अभियोजन यह साबित करने में विफल रहा कि आरोपी सुजीत सिंह उर्फ सुरजीत सिंह अपने गिरोह का सरगना है और आरोपी सांसद अतुल सिंह, अनिल कुमार मिश्र व राजन सिंह उस गिरोह के सदस्य हैं। ऐसे में चारो आरोपियों को गैगेस्टर एवं समझ विरोधी क्रियाकलाप अधिनियम में बरी किया जाता है।
अदालत में आरोपी सांसद का पक्ष अधिवक्ता अनुज यादव व दिलीप श्रीवास्तव ने रखा। अभियोजन के मुताबिक 3 अप्रैल 2009 को प्रभारी निरीक्षक मंडुआडीह धर्मवीर सिंह ने अभिलेखों का अध्ययन करने के बाद पाया कि सुजीत सिंह नाजायज गिरोहबंद किस्म का अपराधी है और नाजायज गिरोह बनाकर अपने गैंग व अन्य सदस्यों के आर्थिक, सामाजिक व भौतिक लाभ के लिए अपराध को अपना पेशा बना लिया है। सुजीत सिंह गैंग का लीडर है तथा उसके गैंग के मुख्य सदस्य अतुल सिंह, अनिल मिश्रा और राजन सिंह हैं।
इन लोगों के खिलाफ चार अपराधों का जिक्र करते हुए चारों आरोपियों के खिलाफ गैंगस्टर एक्ट का मुकदमा दर्ज किया गया था। डीएम द्वारा इस मामले में 2 अप्रैल 2009 को गैंग चार्ट का अनुमोदन किया गया था और विशेष न्यायाधीश (गैंगेस्टर) की अदालत ने 14 फरवरी 2011 को आरोप पत्र का संज्ञान लिया। अभियोजन की ओर से इस मामले में कुल 19 गवाह पेश किया गया।
मैं बिल्कुल निर्दोष हूं
अदालत में सांसद ने अपने बयान में कहा की मैं बिल्कुल निर्दोष हूं। न तो मैं गैंगस्टर हूं और न मेरा कोई गैंग है। मैं एक राजनीतिक और सामाजिक एवं जनता द्वारा सुना गया निर्वाचित वर्तमान सांसद हूं। मेरे विरोधियों द्वारा साजिश करके सत्ता पक्ष के दबाव में गलत व फर्जी मुकदमा दर्ज कराया गया है।