ये है ग्राफ्टिंग तकनीक
सोलेनेसी एवं कुकुरबिटेसी कुल की सब्जियों में ग्राफ्टिंग तकनीक का प्रयोग किया जाता है। डॉ. आनंद बहादुर ने बताया कि इसमें किसी एक सब्जी के पौधे की नर्सरी तैयार करने के बाद उसमें कलम बांधकर दूसरे पौधे की नर्सरी को लगाते हैं। फिर मौसम के अनुकूल और उर्वरक, पानी आदि दी जाती है। इस तकनीकी से जैविक और अजैविक तना के प्रबंधन (जलभराव, सूखा और मृदाजनित रोगों से लड़ने की क्षमता ज्यादा होती है) कर उत्पादन में 10 से 30 फीसदी की वृद्धि करते हैं। ग्राफ्टिंग तकनीक से तैयार पौधे में खाद, पानी की बचत के साथ उत्पादन ज्यादा होता है।
किसानों को देंगे सात हजार पौधे
पोमैटो व ब्रीमैटो के पौधे किसानों को दिए जा रहे है। अगले माह सात हजार और पौधे दिए जाएंगे।इसके लिए दो हजार से अधिक किसानों को प्रशिक्षण दिया जा चुका है। उन्हें ग्राफ्टिंग चैंबर व डिब्बे में तैयार करने का प्रशिक्षण दिया जा रहा है, ताकि वे खुद तैयार कर सकें।
बैगन, टमाटर व मिर्च को एक ही पौधे में उगाने पर शोध हो रहा है। इसके बेहतर परिणाम सामने आए हैं। -डॉ. टीके बेहरा, निदेशक भारतीय सब्जी अनुसंधान संस्थान