काशी के ब्राह्मण कश्मीर में बंद पड़े मंदिराें के कपाट खोलेंगे। तीन दशक से बंद चल रहे मंदिरों में जल्द ही वेदमंत्र, घंटा-घड़ियाल और स्तुतियों के पाठ गूंजेंगे। श्री काशी विद्वत कर्मकांड परिषद ने बुधवार को इसकी पहल की है। राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने बंद चल रहे मंदिरों के कपाट खोलने और पूजन करने का आग्रह किया है।
बुधवार को रवींद्रपुरी स्थित वेद पारायण केंद्रम में श्री काशी विद्वत कर्मकांड परिषद की पहली बैठक आयोजित की गई। परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष आचार्य अशोक द्विवेदी ने बताया कि कश्मीर में कश्मीरी पंडितों के पलायन के बाद से मंदिरों में पूजा-पाठ, भोग-राग बंद चल रहे हैं। बैठक में निर्णय लिया गया है कि कश्मीर में सौ से अधिक मंदिर 1990 से ही लगातार बंद हैं। सभी मंदिरों में दोबारा पूजन, रखरखाव और जीर्णोद्धार की बेहद आवश्यकता है। कर्मकांड परिषद ने राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर सभी बंद पड़े मंदिराें को खुलवाने का अनुरोध किया है। अनुमति मिलते ही परिषद के निर्देशन में काशी के विद्वान ब्राह्मण कश्मीर के बंद पड़े मंदिरों के कपाट खोलकर पुन: राग-भोग, पूजन और आरती की प्रक्रिया आरंभ करेंगे। इसकी कार्ययोजना तैयार कर ली गई है। राष्ट्रीय अध्यक्ष ने बताया कि कर्मकांड पद्धति के विपरीत आचरण से समाज की स्थिति भयावह होती जा रही है। कर्मकांड को अब इवेंट बनाया जा रहा है और कर्मकांड परिषद सही कर्मकांड के जरिए प्राचीन वैदिक परंपराओं व यज्ञ अनुष्ठानों की स्थापना करेगी। बैठक में लखनऊ से अमरनाथ मिश्र, पं. दीनानाथ तिवारी, पं. रघुवर प्रसाद त्रिपाठी, मणि कुमार झा, संजय मालवीय, नारायण शर्मा शंकर, कलेश कुमार मिश्र, सतीश चंद्र पांडेय, पुणे से डॉ. परागचंद्रकांत कासकर, बाबा नंद किशोर, अजय शर्मा, मारुतिनंदन पांडेय मौजूद रहे।