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आईएमए और बीएचयू में खून का संकट

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वाराणसी। कोरोना कॉल में जरूरतमंदों की हर कोई अपने-अपने तरीके से मदद करने में लगा है। लेकिन लॉकडाउन में इस समय सबसे अधिक जरूरत थैलेसीमिया पीड़ित बच्चों सहित उन लोगों की मदद करने की जरूरत है, जिन्हें हर महीने ब्लड की जरूरत होती है। अगर समय से उन्हें ब्लड ना मिले तो इलाज का संकट हो सकता है।
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लॉकडाउन में आईएमए और बीएचयू ब्लड बैंक में खून का संकट गहरा गया है। हालत यह है कि यहां रिजर्व स्टॉक भी अब खाली होने लगा है। इसके लिए दोनों संस्थानों की ओर से लोगों से रक्तदान की अपील की जा रही है। आईएमए ब्लड बैंक की क्षमता करीब तीन हजार यूनिट की है और यहां 700 यूनिट ब्लड रिजर्व में रहता है। हर महीने औसतन 50 थैलेसीमिया बच्चों को 100 से 150 यूनिट ब्लड बिना किसी चार्ज के डोनेट किया जाता है। अब लॉकडाउन में रक्तदान में भी कमी आई है। अध्यक्ष डॉ. आलोक भारद्वाज के मुताबिक रिजर्व स्टॉक से ही फिलहाल जरूरतमंदों की मदद की जा रही है। अस्पताल में एबी पॉजिटिव और निगेटिव ब्लड बिल्कुल ही नहीं है। अगर कोई जरूरतमंद इस ग्रुप का आता है तो उसे नहीं दिया जा सकता है। सामाजिक संस्थाओं, युवाओं से रक्तदान की अपील भी की जा रही है। उधर 2000 यूनिट क्षमता के बीएचयू ब्लड बैंक में भी इस समय केवल 250 यूनिट ब्लड ही है। औसतन हर महीने थैलेसीमिया-हीमोफीलिया पीड़ित बच्चों के साथ ही अन्य जरूरतमंदों को 400 से 500 यूनिट ब्लड बिना किसी चार्ज के दिया जाता है। ब्लड बैंक के सीएमओ इंचार्ज डॉ. एसके सिंह ने बताया कि अधिक से अधिक लोगों को स्व रक्तदान की अपील की जा रही है, जिससे जरूरतमंदों की मदद की जा सके।
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