अभी के अध्ययन में हमने यह पाया कि जो बाहर कालापन दिख रहा है, यह बाहर से काला नहीं पड़ रहा है बल्कि हो सकता है कि उस समय जब इसे बनाया गया हो तो पत्थरों को जोड़ने के लिए किसी न किसी प्रकार के केमिकल का प्रयोग किया गया होगा। अंदर से ही उसका रिसाव हो रहा है।
बौद्ध धर्मावलंबियों का है पवित्र स्थल
भगवान बुद्ध की प्रथम धर्म उपदेश स्थली को देश-विदेश से देखने के लिए पर्यटक आते हैं। बौद्ध अनुयायियों के लिए यह स्थान एक पवित्र तीर्थ स्थल है। पुरातात्विक अवशेषों से यह ज्ञात होता है कि कभी यह खंडहर परिसर समृद्ध व सुनियोजित तरीके से बनाया गया मठ रहा होगा। इतिहास में दर्ज है कि भगवान बुद्ध द्वारा यहीं पर अपने पांच शिष्यों को प्रथम धर्म उपदेश दिया गया था। वहीं पर आज धमेख स्तूप स्थित है।
लगभग बुद्ध के 250 साल बाद सम्राट अशोक ने जब बौद्ध धर्म अपनाया तब उन्होंने भगवान बुद्ध से संबंधित सभी स्थलों का सुंदरीकरण करवाया। इसी क्रम में सारनाथ में अशोक द्वारा धमेख स्तूप, अशोक स्तंभ व धर्मराजिका स्तूप का निर्माण कराया गया। पुरातात्विक खंडहर परिसर में स्थित दोनों स्तूपों का निर्माण भगवान बुद्ध के अस्थि अवशेषों के ऊपर हुआ था। जिनमें से धर्मराजिका स्तूप अब अवशेष मात्र ही बचा है।