बहराइच की भाजपा सांसद साध्वी सावित्री बाई फुले ने कहा कि हम किसी के गुलाम नहीं है। यदि मैं सांसद बनी हूं तो वह बाबा साहब डा. भीमराव आंबेडकर की देन है। उनके द्वारा संविधान में दी गई व्यवस्था के अनुसार मेरी सीट आरक्षित नहीं होती तो क्या मैं सांसद बन पाती।
वो गुरुवार को गाजीपुर जिले के बाराचवर रामलीला मैदान में ‘भीम जागरण’ महोत्सव में बोल रहीं थीं। इसमें दलित समुदाय को संविधान में मिले अधिकारों से सामंती सोच के लोगों द्वारा वंचित करने की साजिश के प्रति सचेत किया गया। उन्होंने कहा कि सामंती सोच के लोगों द्वारा चलाई जाने वाली पार्टी में क्या मुझे टिकट मिल पाता।
यह लोग संविधान जलाकर 85 प्रतिशत लोगों का हक हड़पना चाहते हैं। कभी कांग्रेस ने इस देश को लूटा और अब राम नाम जपने वाले लूट रहे हैं। आज जरूरत इस बात की है कि दलित समाज एवं मुस्लिम समाज एक साथ होकर समाज और राजनीति में परिवर्तन लाए। लोगों से अपने वोट का सही जगह इस्तेमाल करने की अपील किया।
जेएनयू के प्रो. डा. महेंद्र प्रताप राणा ने कहा कि जब तक ब्राह्मण समाज की चंगुल से दलित समाज नहीं निकलेगा, उस वक्त तक उसकी तरक्की नहीं होगी। जितनी कमाई मंदिरों से होती है, उतनी भारत सरकार की भी नहीं है।
नमो बुद्धाये जनसेवा समिति के प्रदेश अध्यक्ष अक्षयवर नाथ कन्नौजिया ने कहा कि आज सरकार में बैठे लोग संविधान के अनुसार नहीं, बल्कि मनोवादी ग्रंथ के मुताबिक इस देश का संचालन करना चाहते हैं। जब तक दलित समाज का एक भी बच्चा जिंदा रहेगा, संविधान बदलने नहीं दिया जाएगा।
कार्यक्रम में डा. भीमराव आंबेडकर के सपने को आगे बढाने के लिए वह जीवन पर्यंत दलित समुदाय को जगाने वाले कामरेड हरिवंशी मास्टर का सम्मान किया गया। कपिल देव केशरी ने अतिथियों का स्वागत किया एवं मुख्य अतिथि को भगवान बुद्ध की प्रतिमा भेंट की।