किशोरी से दुष्कर्म के मामले में सोनभद्र की दुद्धी सीट से भाजपा विधायक रामदुलार गोंड को 25 साल की सजा सुनाई गई है। ऐसे में अब उनकी विधानसभा सदस्यता भी चली जाएगी। जनप्रतिनिधि कानून की धारा 8(3) के मुताबिक यदि किसी व्यक्ति को दो साल या उससे ज्यादा की सजा होती है तो वह अयोग्य हो जाएगा। जेल से रिहा होने के छह साल बाद तक वह जनप्रतिनिधि बनने के लिए अयोग्य रहेगा।
इसकी उपधारा 8(4) में प्रावधान है कि दोषी ठहराए जाने के तीन माह तक किसी जनप्रतिनिधि को अयोग्य करार नहीं दिया जा सकता है। दोषी ठहराए गए सांसद या विधायक ने कोर्ट के निर्णय को इन दौरान यदि ऊपरी अदालत में चुनौती दी है तो वहां मामले की सुनवाई पूरी होने तक उन्हें अयोग्य नहीं ठहराया जा सकता है।
जनप्रतिनिधि की सदस्यता रद्द होने के बाद विधानसभा सचिवालय एक लेटर जारी करके उस सीट को रिक्त घोषित कर देता है। सीट रिक्त होने की जानकारी सचिवालय चुनाव आयोग को देगा। इसके बाद चुनाव आयोग उस सीट पर उपचुनाव कराने की प्रक्रिया शुरू करेगा।