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भाजपा नेता - पुलिस विवाद : बैकफुट पर पुलिस, मुकदमे से हटाई गई हत्या के प्रयास और लूट की धारा

Sat, 04 Jul 2020 11:47 PM IST
गीतार्जुन गौतम न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
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लंका पुलिस के साथ मारपीट के मामले में गिरफ्तार अधिवक्ता वीरेन्द्र प्रताप सिंह उर्फ बिंदू को पेशी के लिए लेकर जाती पुलिस । - फोटो : अमर उजाला।
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बीजेपी के जिला महामंत्री और जिला पंचायत सदस्य सुरेंद्र सिंह पटेल सहित अन्य के खिलाफ हत्या के प्रयास, लूट और अपहरण सहित 19 धाराओं में दर्ज मुकदमे के मामले में पुलिस 24 घंटे के भीतर ही बैकफुट पर आ गई। दर्ज मुकदमे से पुलिस ने हत्या के प्रयास, लूट और अपहरण की धारा हटा दी तो शनिवार को अदालत ने बीजेपी नेता और उनके भाई को जमानत अर्जी मंजूर कर ली। 

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इस प्रकरण में पुलिस की जल्दबाजी और दर्ज मुकदमे को लेकर सड़क से लेकर अदालत तक खासी किरकिरी हुई। सुंदरपुर चौकी इंचार्ज सुनील गौड़ के अनुसार, शुक्रवार की रात 10 बजे एक शिकायत के आधार पर फैंटम दस्ते के दो सिपाही सुंदरपुर सब्जी मंडी के समीप गए थे। इस दौरान अचानक काशी विद्यापीठ छात्रसंघ का पूर्व अध्यक्ष विकास पटेल अपने साथियों के साथ मौके पर आया और सिपाहियों से उलझकर शिकायतकर्ता को धमकाने लगा।
 

सिपाहियों के बुलाने पर दरोगा भी वहां पहुंचे। तब तक विकास के बुलाने पर उसके पिता सुरेंद्र और अन्य लोग मौके पर आ गए। इसके बाद सभी दरोगा और सिपाहियों को घसीट कर अपने घर के पास ले गए और मारपीट कर उनकी वर्दी फाड़ कर सोने की चेन छीन लिए। दरोगा सुनील की तहरीर के आधार पर लंका थाने में बीजेपी नेता सुरेंद्र, उनके बेटे विकास सहित सात नामजद और अन्य अज्ञात के खिलाफ 19 धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया।

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अधिवक्ता वीरेंद्र प्रताप सिंह उर्फ बिंदू की जमानत अर्जी स्वीकार

शनिवार को मुकदमे से हत्या का प्रयास, लूट और अपहरण की धाराएं हटाए जाने के बाद अपर जिला जज प्रथम प्रदीप कुमार सिंह की अदालत ने आरोपी भाजपा नेता सुरेंद्र पटेल और उनके भाई अधिवक्ता वीरेंद्र प्रताप सिंह उर्फ बिंदू की जमानत अर्जी स्वीकार कर ली। आरोपियों का पक्ष अदालत में अधिवक्ता अनुज यादव ने रखा। वहीं, इस प्रकरण की जांच अब सीओ भेलूपुर प्रीति त्रिपाठी को सौंप दी गई है।
वीडियो क्लिप देखी गई। उसमें अपहरण, लूट और हत्या के प्रयास की पुष्टि नहीं हुई। दरोगा की तहरीर में भी कुछ भ्रमात्मक बातें है, जैसे कि रात 10 बजे दुकानों के शटर धड़ाधड़ गिरने लगे। इसलिए हत्या का प्रयास, लूट और अपहरण की धारा हटा ली गई है। किसी के भी प्रति हम गलत तरीके से कार्रवाई के लिए इजाजत नहीं दे सकते हैं, जो सही है, उसी के आधार पर कार्रवाई होगी। - प्रभाकर चौधरी, एसएसपी  
 

सोशल डिस्टेंसिंग की धज्जियां उड़ाई, अधिवक्ताओं ने की नारेबाजी  

बीजेपी नेता सुरेंद्र और उनके भाई को गुरुवार की रात पुलिस द्वारा गिरफ्तार करने के बाद लंका थाने में पार्टी के स्थानीय नेताओं की भारी भीड़ जुट गई थी। इस दौरान सोशल डिस्टेंसिंग की जमकर धज्जियां उड़ाई गईं। 

वहीं, शनिवार को बीजेपी नेता को जब अदालत में पेश किया गया तो कचहरी में पार्टी नेताओं और अधिवक्ताओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। इस दौरान सोशल डिस्टेंसिंग का नियम तार-तार हुआ और कई लोग बगैर मास्क के भी दिखे, लेकिन उन्हें कोई रोकने या टोकने वाला नहीं दिखा। इसी दौरान कचहरी में अधिवक्ता और उनके भाई के उत्पीड़न का आरोप पुलिस पर लगाकर अधिवक्ताओं ने जमकर नारेबाजी भी की। 

आरोपी नेता और उनके भाई को अदालत से लेकर भागी पुलिस  
आरोपी बीजेपी नेता और उनके अधिवक्ता भाई को रिमांड मजिस्ट्रेट अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट पंचम विश्वजीत सिंह की अदालत में पुलिस द्वारा भारी सुरक्षा व्यवस्था में लाया गया। इसकी सूचना पाकर न्यायालय में अधिवक्ताओं की भीड़ इकट्ठा होने लगी। अधिवक्ताओं के विरोध और उनकी बढ़ती संख्या को देख आरोपियों की रिमांड प्रक्रिया पूर्ण हुए बिना ही पुलिस को उन्हें लेकर एसएसपी कार्यालय की ओर भागना पड़ा। 

उधर इससे पहले आरोपी भाजपा नेता और अधिवक्ता को पुलिस द्वारा सुबह 11 बजे ही रिमांड मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश किया गया। साथ ही आरोपियों के अधिवक्ता को बिना सूचना दिए ही न्यायालय में पूरे कागजात ना होने के बावजूद रिमांड बनाए जाने और रिमांड पेपर पर आरोपियों के दस्तखत कराए बगैर न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेजने की मांग की गई। इस पर वहां मौजूद अधिवक्ता रवि प्रकाश श्रीवास्तव और डीएन यादव समेत अन्य ने विरोध करते हुए रिमांड बनाए जाने की न्यायिक प्रक्रिया पर सवाल उठाया। 
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समझदारी से करते कार्रवाई तो न होती पुलिस की किरकिरी  

बीजेपी नेता के मामले में पुलिस ने खुद से अपनी किरकिरी कराई। शनिवार को कचहरी में अधिवक्ताओं का कहना था कि दरोगा ने खुद तहरीर लिखी और उसमें गड़बड़ी की। जैसे कि, दरोगा ने घटना का समय रात 10 बजे लिखा और फिर यह भी लिखा कि दुकानों के शटर धड़ाधड़ गिरने लगे। 

कोरोना काल में सबको पता है कि रात आठ बजे तक सारी दुकानें बंद हो जाती हैं। इसी तरह दरोगा का अपहरण और चेन लूटने का आरोप भी सही नहीं है। जब सब कुछ कैमरे में कैद ही था तो दरोगा को उसी के अनुसार वास्तविक घटना की तहरीर देकर मुकदमा दर्ज कराना चाहिए था। पुलिस ने खुद से ही अपनी किरकिरी कराई।
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