वर्ष 1984 में कांशीराम ने बहुजन समाज पार्टी की नींव रखी थी। पार्टी ने 1989 में यहां पहली बार गंगाराम ग्वाल को अपना उम्मीदवार बनाया था। इस चुनाव में बसपा को तीसरा स्थान हासिल हुआ था। गंगाराम ग्वाल को 32,574 मत मिले थे। 1991 में बसपा के काशीनाथ यादव 32,861 मत प्राप्त कर चौथे स्थान पर रहे।
पांच साल बाद 1996 में हुए आम चुनाव में पार्टी का प्रदर्शन सुधरा। कमला राजभर 70,316 मत प्राप्त कर तीसरे पायदान पर रहे। 1998 में पार्टी प्रत्याशी डॉ. अवधेश सिंह 1,01,024 मत हासिल करने के बाद भी तीसरे पायदान पर ही रहे। हालांकि एक साल बाद ही 1999 में हुए चुनाव में बसपा के बाबूलाल पटेल 75059 मतों के साथ पांचवें पायदान पर खिसक गए।
2004 में बसपा के अमीर चंद पटेल 59518 मत हासिल कर चौथे स्थान पर रहे। 2009 में पार्टी ने सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करते हुए दूसरा स्थान हासिल किया। 2014 में बसपा के विजय प्रकाश जायसवाल को 60579 मत मिले। वे चौथे स्थान पर रहे।
भाजपा को 30.52 व बसपा को 27.94 फीसदी वोट मिले
2009 में वाराणसी सीट पर बसपा का प्रदर्शन सबसे शानदार रहा। बसपा प्रत्याशी मुख्तार अंसारी दूसरे स्थान पर रहे। सपा और कांग्रेस के उम्मीदवार उनसे काफी पीछे रहे। इस चुनाव में मुख्तार को 27.94 फीसदी मत हासिल हुए थे। जबकि जीत दर्ज करने वाले डॉ. जोशी को 30.52 फीसदी मत मिले थे।
सपा के अजय राय को 18.61 फीसदी, कांग्रेस के डॉ. राजेश मिश्र को 9.98 फीसदी और अपना दल के विजयप्रकाश को 9.90 फीसदी मत मिले थे। इस प्रकार भाजपा के डॉ. मुरली मनोहर जोशी ने 2.58 फीसदी मतों के अंतर से यह मुकाबला जीता था।