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Varanasi Lok Sabha Seat: सपा-कांग्रेस नहीं बसपा से भाजपा को मिली कड़ी टक्कर, देखें क्या कहते हैं आंकड़े

Sun, 14 Apr 2024 03:45 PM IST
अमन विश्वकर्मा रोहित चतुर्वेदी, अमर उजाला, वाराणसी

सार

Varanasi Lok Sabha Seat: 2009 में वाराणसी सीट पर बसपा का प्रदर्शन सबसे शानदार रहा। बसपा प्रत्याशी मुख्तार अंसारी दूसरे स्थान पर रहे। जबकि उनके धुर विरोधी अजय राय सपा के सिंबल पर मैदान में थे। 2004 में यहां से जीत चुके कांग्रेस के राजेश मिश्रा 66,386 मतों के साथ चौथे स्थान पर रहे।
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वाराणसी संसदीय सीट - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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भाजपा के चुनावी रणनीतिकार अब भले ही वाराणसी संसदीय सीट को अपनी परंपरागत सीट मानते हों लेकिन एक समय ऐसा भी था जब इस सीट को जीतने में पार्टी प्रत्याशी के पसीने छूट गए थे। राष्ट्रीय राजनीति में कद्दावर छवि रखने वाले डॉ. मुरली मनोहर जोशी को यहां माफिया मुख्तार अंसारी से कड़ी टक्कर मिली थी। मतदान के दिन अंतिम दौर में हिंदू मतों के ध्रुवीकरण के चलते जोशी की नैया पार लगी थी। वर्ष 2009 का लोकसभा चुनाव कई मायने में अहम था।

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पहली बार यहां बसपा ने अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराई थी। बसपा के टिकट पर माफिया मुख्तार अंसारी मैदान में थे। जबकि उनके धुर विरोधी अजय राय सपा के सिंबल पर मैदान में थे। चुनाव में डॉ. जोशी को 2,03,122 मत मिले थे जबकि जेल में रहते हुए चुनाव लड़ने वाले मुख्तार अंसारी 1,85,911 मत हासिल करने में सफल रहे। इस चुनाव में भाजपा छोड़कर समाजवादी पार्टी का दामन थामने वाले अजय राय को 1,23,874 मत मिले थे। 

डॉ. जोशी ने यह मुकाबला महज 17,211 मतों से जीता था। 2004 में यहां से जीत चुके कांग्रेस के राजेश मिश्रा 66,386 मतों के साथ चौथे स्थान पर रहे। अपना दल के विजयप्रकाश को 65,912 मत मिले थे।
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समीकरण की बात करें तो कांग्रेस के डॉ. राजेश मिश्रा ने मुस्लिम मतों में सेंध लगाकर मुख्तार का नुकसान किया और अजय राय ने स्थानीय होने के कारण जोशी के वोट बैंक में सेंधमारी की, लेकिन भाजपा का पुराना गढ़ होने के कारण जोशी को जीत हासिल हुई। हालांकि 12वें से 16वें चक्र की मतगणना के दौरान जोशी और मुख्तार के बीच मतों का फासला 4000 का ही रह गया था, लेकिन उसके बाद जोशी ने जो बढ़त हासिल की वह अंत तक बनी रही।

2004 के लोकसभा चुनाव में इलाहाबाद में हार झेलने के बाद जोशी ने जीत की उम्मीद के साथ वाराणसी का रुख किया था। जोशी की जीत में उनकी साफ-सुथरी राजनीति छवि ने निश्चित तौर पर बड़ा योगदान दिया लेकिन स्थानीय लोगों का मानना है कि जोशी को जीत सिर्फ इसलिए मिली क्योंकि वह एक ऐसे क्षेत्र से चुनाव लड़ रहे थे, जो हमेशा से भाजपा के प्रत्याशियों लिए सुरक्षित रहा है।

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बसपा का इतिहास का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन

वर्ष 1984 में कांशीराम ने बहुजन समाज पार्टी की नींव रखी थी। पार्टी ने 1989 में यहां पहली बार गंगाराम ग्वाल को अपना उम्मीदवार बनाया था। इस चुनाव में बसपा को तीसरा स्थान हासिल हुआ था। गंगाराम ग्वाल को 32,574 मत मिले थे। 1991 में बसपा के काशीनाथ यादव 32,861 मत प्राप्त कर चौथे स्थान पर रहे। 

पांच साल बाद 1996 में हुए आम चुनाव में पार्टी का प्रदर्शन सुधरा। कमला राजभर 70,316 मत प्राप्त कर तीसरे पायदान पर रहे। 1998 में पार्टी प्रत्याशी डॉ. अवधेश सिंह 1,01,024 मत हासिल करने के बाद भी तीसरे पायदान पर ही रहे। हालांकि एक साल बाद ही 1999 में हुए चुनाव में बसपा के बाबूलाल पटेल 75059 मतों के साथ पांचवें पायदान पर खिसक गए। 

2004 में बसपा के अमीर चंद पटेल 59518 मत हासिल कर चौथे स्थान पर रहे। 2009 में पार्टी ने सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करते हुए दूसरा स्थान हासिल किया। 2014 में बसपा के विजय प्रकाश जायसवाल को 60579 मत मिले। वे चौथे स्थान पर रहे।

भाजपा को 30.52 व बसपा को 27.94 फीसदी वोट मिले
2009 में वाराणसी सीट पर बसपा का प्रदर्शन सबसे शानदार रहा। बसपा प्रत्याशी मुख्तार अंसारी दूसरे स्थान पर रहे। सपा और कांग्रेस के उम्मीदवार उनसे काफी पीछे रहे। इस चुनाव में मुख्तार को 27.94 फीसदी मत हासिल हुए थे। जबकि जीत दर्ज करने वाले डॉ. जोशी को 30.52 फीसदी मत मिले थे। 

सपा के अजय राय को 18.61 फीसदी, कांग्रेस के डॉ. राजेश मिश्र को 9.98 फीसदी और अपना दल के विजयप्रकाश को 9.90 फीसदी मत मिले थे। इस प्रकार भाजपा के डॉ. मुरली मनोहर जोशी ने 2.58 फीसदी मतों के अंतर से यह मुकाबला जीता था।
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