गंगा पर सांस्कृतिक प्रस्तुति देते कलाकार।
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गुरु से सीखा समझा और अनुभूत किया हुआ संगीत गुरु चरणों में अर्पित करते हुए उन्होंने कहा कि मेरी हर प्रस्तुति में अप्पा जी का प्रेम मैं महसूस करती हूं। उनके साथ पंडित धर्मनाथ मिश्र ने हारमोनियम पर और उदय शंकर मिश्र ने तबला संगति की। भोर प्रणामी की अंतिम मंच प्रस्तुति के लिए बनारस घराने के शीर्षस्थ गायक पद्मभूषण से सम्मानित पंडित साजन मिश्र अपने पुत्र स्वरांश मिश्र के साथ मंच पर आए।
अप्पा जी के साथ स्मृतियों को सजीव करते हुए उन्होंने गायन के बीच-बीच में अप्पा जी के विराट व्यक्तित्व पर भी प्रकाश डाला। पंडित धर्मनाथ मिश्र ने हारमोनियम पर और राजेश मिश्र ने तबला संगति की। संचालन सौरभ चक्रवती ने किया। इस दौरान 39 जीटीसी कमांडेंट ब्रिगेडियर अनिर्बान दत्ता, वीडीए उपाध्यक्ष पुलकित खरे, पंडित त्रिलोकी नाथ मिश्रा, प्रो. संगीता पंडित, धर्मेन्द्र सिंह उपस्थित रहे।
अप्पाजी की गायकी जीवंत हो उठती थी हर विधा
पद्मश्री मालिनी अवस्थी ने कहा अप्पाजी की गायिकी में ठुमरी ही नहीं, बल्कि हर विधा जीवंत हो उठती थी। उस दौर में जब महिलाओं के लिए संगीत के मंच पर आना चुनौतीपूर्ण था, उन्होंने तमाम मुश्किलों का सामना कर एक विदुषी के रूप में खुद को स्थापित किया और महिलाओं के लिए गरिमामयी मंच तैयार किया। अप्पा जी ने बनारस घराने की पूर्वी अंग गायिकी को विश्व स्तर पर पहचान दिलाई। उनकी कला और संघर्ष नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा हैं।
रेडियो से शुरू हुई संगीत की यात्रा
गिरिजा देवी ने 1949 में रेडियो पर गायन शुरू किया और 1951 में बिहार के आरा कॉन्फ्रेंस में पंडित ओंकारनाथ की अनुपस्थिति में मंच संभाला। 1952 में दिल्ली के कॉन्स्टिट्यूशन क्लब में राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री के सामने उनकी ठुमरी प्रस्तुति को खूब सराहा गया। संगीत में उनके योगदान के लिए उन्हें 1972 में पद्मश्री, 1989 में पद्म भूषण, और 2016 में पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया। 24 अक्टूबर 2017 को दिल का दौरा पड़ने से उनका निधन हो गया।