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आगे चले बहुरि रघुराया...

Mon, 03 Oct 2016 01:23 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, वाराणसी
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काशिराज अनंत नारायण सिंह की शाही सवारी देखने के लिए रामनगर में किला रोड की दोनों पटरियों पर रविवार को भीड़ खड़ी नजर आई। आगे आगे घोड़े पर डंका बजता रहा और काशिराज की सवारी पंचवटी पहुंची। वहां हाथी पर सवार होकर उन्होंने लीला देखी। मशालची मशाल जलाकर आगे आगे चल रहे थे।
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आगें चले बहुरि रघुराया/रिष्यमूक पर्वत नियराया/तहं रह सचिव सहित सुग्रीवा/आवत देखि अतुल बल सींवा/राम राम हा राम पुकारी/ हमहि देखि दीन्हेउ पट डारी/कह सुग्रीव सुनहु रघुबीरा/तजहु सोच मन आनहु धीरा/सब प्रकार करिहउं सेवकाई/जेहि बिधि मिलिहि जानकी माई/नाथ बालि अरु मैं द्वौ भाई/प्रीति रही कछु बरनि न जाई...। सीता की खोज मेें निकले भगवान राम के रिष्यमूक पर्वत पर पहुंचने से रविवार को रामनगर की रामलीला की शुरुआत हुई। भगवान रिष्यमूक पहुंचे और वहां सुग्रीव से उनकी मित्रता हो गई। सुग्रीव ने उन्हें भरोसा दिलाया कि हे प्रभु माता जानकी की खोज में बानरी सेना कोई कसर बाकी नहीं रखेगी। उधर, सुग्रीव ने बालि के अत्याचार की भी कथा भगवान को सुनाई और उससे मुक्ति की गुहार लगाई। अब जल्द ही बालि-सुग्रीव के बीच युद्ध होगा।


रामनगर की विख्यात रामलीला में रविवार को सीता के वियोग में राम के विलाप के अलावा जयाटु अंत्येष्टि, शबरी फल भोजन, पंपासर पर्यटन, नारद, हनुमान, सुग्रीव के मिलन की लीला का मंचन किया गया। पंचवटी और भीटी स्थित पंपासर तालाब के पास लीला का भावपूर्ण मंचन देखने के लिए परंपरागत वेश में हजारों की तादाद में लीला प्रेमी पहुंचे। राम के विलाप की लीला देख लोग की आंखों में आंसू उतर आए। काशिराज अनंत नारायण सिंह हाथी पर सवार होकर लीला देख रहे थे। राम सीता को ढूंढते हुए आगे बढ़ते हैं। रास्ते में घायल जटायु मिलते हैं। जटायु ने भगवान राम को बताया कि सीता का हरण रावण ने किया है। जटायु को सद्गति प्राप्त होने के बाद भगवान राम और लक्ष्मण रिष्यमूक पर्वत पर पहुंचे, जहां सुग्रीव से उनकी मित्रता हो गई। 
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