1982-85 में बीएचयू के संस्कृत विद्या धर्म विज्ञान संकाय में प्रो. रामचंद्र पांडेय ने लौह यंत्रों की व्यवस्था कर संकाय के भवन के ऊपरी तल पर एक लघु तारामंडपम बनवाया था। लेकिन, वर्तमान में इसका इस्तेमाल न के बराबर है। कंप्यूटर, टेलीस्कोप और आधुनिक तारामंडल के आने से इसकी प्रासंगिकता बढ़ गई है। ऐसे में बीएचयू में अब लघु वेधशाला बनेगी।
छात्रों को होंगी ये सहूलियतें
- विभागीय छात्रों का प्रायोगिक अध्ययन से नए अवसरों और ज्ञान में बढ़ोतरी होगी।
- शोध छात्रों को नवाचार में मदद मिलेगी।
- गणितीय और प्रायोगिक अध्ययन से शास्त्रीय अंतर स्पष्ट हो सकेगा।
- खगोलीय परिवर्तन की जानकारी का एक डेटबेस तैयार होगा। इसका समय समय पर परीक्षण भी किया जाएगा।
- आपदा प्रबंधन में खगोलीय परिर्वतनों पर शोध संभव होगा।
- दूसरे विषयों के छात्र और छात्राओं को एनईपी के तहत शोध में मदद मिलेगी।