काशी हिंदू विश्वविद्यालय में अत्याधुनिक चिकित्सा सुविधाओं से युक्त कैंसर हास्पिटल बनाने की योजना है। नौ एकड़ भूमि पर बनने वाले इस अस्पताल पर 800 करोड़ रुपये खर्च होंगे। बीएचयू के चिकित्सा विज्ञान संस्थान (आईएमएस) ने इसका प्रस्ताव मानव संसाधन विकास मंत्रालय (एचआरडी) और स्वास्थ्य मंत्रालय को भेज दिया है। तीन सौ बिस्तर वाले इस अस्पताल में कैंसर मरीजों को एक हीछत के नीचे उपचार की सभी सुविधाएं मुहैया होंगी। कैंसर के इलाज के लिए उत्तर प्रदेश और बिहार में एक भी बड़ा अस्पताल नहीं है। इसके बनने के बाद इन दोनों प्रांतों के मरीजों को मुंबई और दिल्ली के चक्कर नहीं काटने होंगे।
बीएचयू आईएमएस की ओर से कैंसर हास्पिटल के लिए पहले जो प्रस्ताव भेजा गया था, उसे स्वास्थ्य मंत्रालय ने खारिज करते हुए नए सिरे से प्रस्ताव मांगा था। अब आईएमएस के कैंसर विभाग ने नए सिरे से प्रस्ताव तैयार कर भेज दिया है। बीएचयू के सुंदर बगिया परिसर में नौ एकड़ जमीन उपलब्ध है, जिसमें यह अस्पताल बनाने की तैयारी है। इसका नाम ‘मदन मोहन मालवीय कैंसर हास्पिटल एंड रिसर्च सेंटर’ रखने का प्रस्ताव है। अस्पताल की डिजाइनिंग मुंबई के टाटा मेमोरियल हास्पिटल के सहयोग से तैयार कराई जा रही है। तीन सौ बेड के अस्पताल में जनरल वार्ड, प्राइवेट वार्ड, बोन मैरो सर्जरी, आईसीयू, ओपीडी, आपरेशन थिएटर, सेंकाई, जांच के अलावा अन्य सुविधाएं होंगी। दो रोबोट सिस्टम होंगे, जिससे ऑपरेशन करने में आसानी होगी। साथ ही, आउट रिच प्रोग्राम भी संचालित किए जाएंगे। इसके तहत मोबाइल वैन से समय-समय पर ग्रामीण इलाकों में कैंसर जागरूकता कार्यक्रमों का संचालन होगा।
पूर्वी उत्तर प्रदेश और बिहार में कैंसर के इलाज का कोई पूर्ण अस्पताल नहीं है। इन क्षेत्रों के मरीजों को मुंबई, दिल्ली, चेन्नई, त्रिवेंद्रम और जयपुर जाना पड़ता है। ऐसे में एक ऐसे अस्पताल की यहां बहुत जरूरत है, जहां एक ही छत के नीचे हर तरह के कैंसर का समुचित इलाज हो सके। इसी आधार पर कैंसर हास्पिटल के लिए मानव संसाधन विकास मंत्रालय और स्वास्थ्य मंत्रालय को आठ सौ करोड़ रुपये का रिवाइज प्रस्ताव भेजा गया है। अस्पताल में दो मेडिकल रोबोट सिस्टम भी लगाने की तैयारी है, जिसके लिए अमेरिका की डाविसी मेडिकल रोबोट कंपनी से वार्ता चल रही है।
- डॉ. मल्लिका तिवारी, अध्यक्ष, कैंसर विभाग, बीएचयू