प्लास्टिक का कचरा लाइए, बायो डीजल लेकर जाइए
- आईआईटी बीएचयू में प्लास्टिक वेस्ट से बनेगा बायो डीजल
- अगले महीने लग जाएगा प्लांट, अमेरिकी संस्था से हुआ करार
- किसी भी संस्थान में लगने वाला पहला प्लांट, नीति आयोग ने दी मंजूरी
अमर उजाला ब्यूरो/रबीश श्रीवास्तव
वाराणसी। अब घर से निकलने वाला प्लास्टिक का कचरा फेंकने की जरूरत नहीं है। उसको जमा कर आप इसके बदले बायो डीजल प्राप्त कर सकते हैं। इसके लिए आईआईटी बीएचयू में प्लास्टिक के कचरे से बायो डीजल बनाने वाले प्लांट अगले महीने तक लग जाएगा। आईआईटी और अमेरिकी संस्था रीन्यू ओशन से करार के बाद अब नीति आयोग ने भी इसकी मंजूरी दे दी है। किसी भी तकनीकी संस्थान में लगने वाला यह देश का पहला प्लांट होगा।
आईआईटी बीएचयू में मई महीने में अमेरिकी संस्था से करार हो चुका है। प्लांट लगने के बाद शहर से निकलने वाले प्लास्टिक के कचरे का जहां सदुपयोग होगा, वहीं इससे होने वाले प्रदूषण से भी मुक्ति मिलेगी। शुरुआत में पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर आईआईटी कैंपस के हॉस्टलों से निकलने वाले कचरों का इस्तेमाल होगा, बाद में यहां नगर निगम सहित अन्य जगहों से आने वाले कचरे को भी लिया जाएगा। इस पूरी व्यवस्था को देख रहे केमिकल इंजीनियरिंग विभाग के प्रो. पीके मिश्रा के मुताबिक यह देश का पहला संस्थान होगा, जहां इस तरह की व्यवस्था शुरू हो रही है। नीति आयोग की मंजूरी के बाद अब प्रदेश सरकार के वित्त विभाग में कुछ औपचारिकताएं हैं, उसके पूरा होने का इंतजार है। एक महीने के भीतर पुणे से प्लांट आ जाएगा, इसके लिए जगह का चयन भी हो चुका है। प्लांट लगने के बाद पायरोलिसिस तकनीक से डीजल बनाया जाएगा।
इनसेट
कचरा जमा करने पर मिलेगा टोकन
प्लांट लगने के बाद यहां प्लास्टिक कचरा जमा करने पर टोकन दिया जाएगा। इसी टोकन को दिखाकर संबंधित व्यक्ति परिसर में बायो डीजल ले सकेगा। इसके लिए परिसर में तीन कलेक्शन सेंटर खुलेगा।
वर्जन
संस्थान के लिए यह बड़ी उपलब्धि है। पायलट प्रोजेक्ट की सफलता के बाद इसे अन्य जगहों के लिए भी शुरू कर दिया जाएगा, जिससे कि प्लास्टिक कचरे का सही निस्तारण हो सके। - प्रो. प्रमोद कुमार जैन, निदेशक, आईआईटी बीएचयू