काशी हिंदू विश्वविद्यालय देश की बड़ी शैक्षणिक संस्था है। इसे और ऊंचाई देने की जरूरत है। दुनिया के शीर्ष विश्वविद्यालयों की सूची में बीएचयू को शुमार करना होगा।
तभी महामना मालवीय के सपने सही मायने में साकार होंगे। यह जिम्मेदारी न सिर्फ कुलपति, अध्यापक, छात्रों की है बल्कि इसके लिए हर स्तर पर सामूहिक और संकल्पित प्रयास किया जाना चाहिए। ये बातें बीएचयू में रविवार से शुरू हुए ‘मालवीय जयंती महोत्सव’ में मुख्य अतिथि राज्यपाल राम नाईक ने कहीं।
बीएचयू के संस्थापक महामना पंडित मदन मोहन मालवीय की जयंती के शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में महामना मालवीय मिशन की ओर से राधाकृष्णन सभागार में आयोजित महोत्सव का उद्घाटन करने के बाद राज्यपाल ने कहा कि शिक्षा, संस्कार और राष्ट्रनिर्माण के महामना के सपनों को एक सूत्र में पिरोना होगा।
तभी उनके सपनों और उद्देश्यों को पूरा किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि बाजारीकरण के दौर में शिक्षा व्यवस्था फंस चुकी है। नए बनने वाले विश्वविद्यालयों में बाजार की तरह डिग्रियां बांटी जा रही हैं। इससे बाहर निकलने की जरूरत है। छात्रों के शैक्षिक, बौद्धिक, शारीरिक उन्नयन के साथ ही उनमें ऐसा चरित्र निर्माण हो, जो दुनिया के किसी भी देश में जाएं तो नाम रोशन करें।
आज देश में अच्छे विश्वविद्यालय की बात होती है तो बीएचयू का नाम आता है। बाजारीकरण से मुक्त संस्कारयुक्त शिक्षा और विश्वविद्यालय की गुणवत्ता बनाए रखना बड़ी चुनौती है।
शिक्षा को संप्रभु बनाने की जरूरत
अध्यक्षता करते हुए कुलपति प्रो. गिरीश चंद्र त्रिपाठी ने कहा कि संस्कारवान समाज ही संस्कृति और भावनाओं की रक्षा करता है। शिक्षा को संप्रभु बनाने की जरूरत है। महामना ने मानव मूल्य, संस्कार तथा शिक्षा के मानक की कसौटी पर बीएचयू को स्थापित कर विश्व को एक दिशा दी।
संचालन डॉ. विजय नाथ पांडेय ने किया। मुख्य अतिथि को शॉल एवं स्मृति चिह्न देकर सम्मानित किया गया। इस मौके पर रेक्टर प्रो. कमलशील, आईआईटी के निदेशक प्रो. राजीव संगल, महामना मालवीय मिशन के संरक्षक डॉ. देवेंद्र प्रताप सिंह, अध्यक्ष डॉ. यूपी शाही, उपाध्यक्ष प्रभु नारायण श्रीवास्तव, अभय पांडेय, चीफ प्राक्टर प्रो. सत्येंद्र सिंह आदि उपस्थित थे।
काश! इस विश्वविद्यालय में पढ़ा होता
राज्यपाल ने कहा कि ‘मुख्य द्वार से प्रवेश करते ही यह बात मन में आई कि काश मैं भी इस विश्वविद्यालय में पढ़ा होता। मैं तो सोच के चला था कि विद्यार्थियों से कुछ बातें शेयर करूंगा लेकिन यहां सभागार में छात्र-छात्राओं की संख्या काफी कम है।