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Varanasi News: अमर उजाला में एक जनवरी को छपी खबर का पीडीएफ भी लग सकता है।

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बीएचयू के छात्र को भोजपुरी में शोध की पहली डिग्री मिली
विवि ने जारी की प्रोविजनल डिग्री, केंद्रीय विश्वविद्यालयों में भोजपुरी में पहला शोध
माई सिटी रिपोर्टर
वाराणसी। बीएचयू भोजपुरी अध्ययन केंद्र के शोध छात्र धीरज कुमार गुप्ता ने 235 पेज का अपना शोध प्रबंध भोजपुरी में लिखा है। ऐसा करने वाले वह पहले छात्र हैं। 24 मार्च को दिल्ली विश्वविद्यालय की प्रो. अल्पना मिश्र की मौजूदगी में शोध मौखिकी के पूरा होने के बाद बीएचयू ने धीरज को दस अप्रैल को प्रोविजनल डिग्री दी। केंद्रीय विश्वविद्यालयों में भोजपुरी में किया गया यह पहला शोध है।
बीएचयू के हिंदी विभाग में डेढ़ साल पहले सेवानिवृत्त प्रो. वशिष्ठ नारायण त्रिपाठी के निर्देशन में धीरज ने भोजपुरी पत्रकारिता कऽ उद्भव आ विकास - एक अध्ययन विषय पर शोध किया। धीरज ने पीएचडी की उपाधि भी प्राप्त कर ली है। भोजपुरी अध्ययन केंद्र के समन्वयक प्रो. श्रीप्रकाश शुक्ल के साथ ही अन्य शिक्षकों, छात्रों ने खुशी जताते हुए धीरज को बधाई दी है।
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मातृभाषा को सम्मान दिलाने का पूरा करेंगे सपना
खोजवां निवासी धीरज ने बताया कि मातृभाषा को सम्मान दिलाने का जो सपना उन्होंने देखा है, उसे पूरा करेंगे। सफलता का श्रेय प्रो. सदानंद शाही, प्रो. श्रीप्रकाश शुक्ल को जाता है। धीरज ने कहा कि सरकार प्राथमिक शिक्षा में मातृभाषा के महत्व को स्वीकार कर रही है तो कम से कम विद्यार्थियों-शोधार्थियों को अपनी मातृभाषा को बढ़ावा देने के लिए आगे आना होगा
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पत्रकारिता के उद्भव और विकास का रेखांकन
धीरज का कहना है कि शोध में भारत सहित विश्व के अलग-अलग देशों में पत्रकारिता के उद्भव और विकास को रेखांकित किया गया है। इसमें भारत में समाज सुधारकों द्वारा कैसे और किस परिस्थिति में भाषाई पत्रकारिता की शुरुआत की गई और असर क्या हुआ। इसका भी जिक्र है।
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