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बीएचयू में त्रि-स्तरीय शिक्षा व्यवस्था: फ्रेंच-रशियन में शॉर्ट टर्म कोर्स, भाषा विज्ञान और भूगोल की पढ़ाई भी

Sat, 19 Sep 2026 03:44 PM IST
Pragati Chand अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।

सार

बीएचयू में फ्रेंच-रशियन में शॉर्ट टर्म कोर्स चलेगा। साथ ही भाषा विज्ञान और भूगोल की भी पढ़ाई होगी। पिछली तीन काउंसिल की बैठकों में लिए गए फैसलों पर काउंसिल की स्वीकृति मिली। 
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बनारस हिंदी विश्वविद्यालय, BHU - फोटो : X (@bhupro)
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विस्तार
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बीएचयू में त्रि-स्तरीय शिक्षा व्यवस्था होगी। दो नई इकाई गठित की गई है। अब एकेडमिक फैसले तीन स्तर पर लिए जाएंगे। एकेडमिक काउंसिल, विश्वविद्यालय शिक्षण संयोजन बोर्ड और संकाय शैक्षणिक समिति शैक्षणिक निर्णय लेगी। इससे विश्वविद्यालय के हर स्तर पर प्रोफेसरों की सहभागिता तय होगी। इसके साथ ही फ्रेंच-रशियन पर दो शॉर्ट टर्म और भाषा विज्ञान व भूगोल पर दो स्नातक कोर्स शुरू करने पर सहमति बनी। ये फैसला शुक्रवार को बीएचयू की एकेडमिक काउंसिल में लिया गया।

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एकेडमिक काउंसिल में कुल 12 नए एजेंडों में से एक को छोड़कर सभी पर सहमति बनी। कुलपति प्रो. अजित कुमार चतुर्वेदी की अध्यक्षता में हुई एकेडमिक काउंसिल में रशियन और फ्रेंच भाषा पर तीन-तीन क्रेडिट का शॉर्ट टर्म कोर्स शुरू करने पर सहमति दी गई। यह मल्टी डिसीप्लनेरी कोर्स होगा जो 45-45 घंटे की अवधि का होगा। रशियन भाषा में फाउंडेशन कोर्स की पढ़ाई विदेशी भाषा विभाग में होगी।

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बीएचयू के संबद्ध आर्य महिला पीजी कॉलेज में भूगोल को मेजर विषय के तौर पर शुरू करने पर फैसला हुआ। वहीं, वसंत महिला महाविद्यालय राजघाट में बीए भाषा विज्ञान कोर्स शुरू करने पर सहमति बनी। कोर्स के संचालन की जांच के लिए बनाई गई निरीक्षण समिति की रिपोर्ट रखी गई।

विश्वविद्यालय स्तर पर होगा डीन (शिक्षण) का नया पद बीएचयू में त्रिस्तरीय शैक्षणिक व्यवस्था स्थापित की जाएगी। शीर्ष स्तर पर एकेडमिक कासिल, फिर विश्वविद्यालय शिक्षण संयोजन बोर्ड और तीसरे स्तर पर संकाय शैक्षणिक समिति होगी। यूनिवर्सिटी एडमिशन कोआर्डिनेशन बोर्ड को पुनर्गठित किया जाएगा। अभी यह बोर्ड मुख्य तौर पर प्रवेश से संबंधित मामलों को देखता है लेकिन पुनर्गठन के बाद इसका दायरा बड़ा होगा।

विश्वविद्यालय शैक्षणिक संयोजन बोर्ड के अध्यक्ष डीन (शिक्षण) होंगे। विश्वविद्यालय स्तर पर डीन (शिक्षण) का नया पद सृजित करने को भी मंजूरी दी है। प्रस्तावित व्यवस्था के तीसरे स्तर पर हर संकाय में फैकल्टी एकेडमिक कमेटी बनेगी। बैठक में विद्वत परिषद के सचिव और कुलसचिव राजन श्रीवास्तव सहित परिषद के सदस्य उपस्थित रहे।
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किसी ने चार तो किसी ने 11 दिन में छोड़ा कैंपस 
फुल टाइम पीएचडी को पार्ट टाइम में बदलने के लिए कुल 31 छात्रों ने अस्थायी रूप से परिसर छोड़ दिया था लेकिन विश्वविद्यालय की ओर से इसे नकार दिया गया था। विश्वविद्यालय का नियम है कि इन्हें ऐसा करने के लिए कम से कम दो साल की रेजीडेंसी यानी कि परिसर में रहना या विभाग में आना अनिवार्य है। इसमें कई छात्र ऐसे थे जिन्होंने पीएचडी में सिर्फ चार और 11 दिन, वहीं कोई 15 महीने तक रहा लेकिन टर्म पूरा नहीं किया। 
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