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Future of Brain: इंसान का दिमाग अगले 100 वर्षों में कैसा होगा, बताएंगे बीएचयू के वैज्ञानिक

Mon, 22 May 2023 01:44 PM IST
उत्पल कांत रबीश श्रीवास्तव, अमर उजाला, वाराणसी

सार

इंसान के दिमाग की संरचना में बदलाव पर पहला अंतर विभागीय शोध बीएचयू के वैज्ञानिक कर रहे हैं। इसकी अध्यक्षता बीएचयू के इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस (आईएमएस) न्यूरोलॉजी विभाग के अध्यक्ष प्रो. विजय नाथ मिश्रा कर रहे हैं। 
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- फोटो : istock
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विस्तार
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इंसान का दिमाग अगले 100 वर्षों में कैसा होगा और किस तरह से काम करेगा, इस पर काशी हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) के वैज्ञानिकों ने शोध शुरू कर दिया है। इसके प्रारंभिक नतीजे चौंकाने वाले हैं। पता चला है कि पिछले दो लाख वर्षों में दिमाग का आकार नहीं बढ़ा है। इसकी तुलना में दिमागी कार्यशैली बढ़ी है। दो लाख वर्ष पहले मनुष्य औजार बनाता था। अब सेटेलाइट बना रहा है। हवाई जहाज बनाकर उड़ा रहा है। शोध तीन वर्ष तक चलेगा।

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इंसान के दिमाग की संरचना में बदलाव पर पहला अंतर विभागीय शोध बीएचयू के वैज्ञानिक कर रहे हैं। इसकी अध्यक्षता बीएचयू के इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस (आईएमएस) न्यूरोलॉजी विभाग के अध्यक्ष प्रो. विजय नाथ मिश्रा कर रहे हैं। आर्कियोलॉजी डिपार्टमेंट के डॉ. जोश रेफेल और दृश्य कला संकाय के प्रो. सुरेश के नायर शोध का हिस्सा हैं।

18 लाख वर्ष तक दिमाग का आकार बढ़ा

प्रो. विजयनाथ मिश्र ने बताया कि पिछले 20 लाख वर्षों के दौरान इंसान के दिमाग की संरचना में हुए बदलाव को समझा जा रहा है। अब तक के अध्ययन से पता चला है कि 18 लाख वर्ष तक दिमाग का आकार बढ़ा, लेकिन पिछले दो लाख वर्षों में दिमाग का आकार जस का तस है। इंसान पहले औजार, चित्र बनाता था, लेकिन अब चंद्रमा पर जाने की कोशिश में लगा है।

प्रो. विजय नाथ मिश्रा और उनकी टीम - फोटो : अमर उजाला
चंद्रमा पर पानी, ईंट, मिट्टी व पत्थर ढूंढ रहा है। इसके संकेत साफ हैं। दिमाग वही है, लेकिन उसकी संरचना में तेजी से बदलाव हुआ है। नया ब्रेन सर्किट बना है। जो दिमाग पहले औजार बनाने में मदद करता था, वह अब सुपर कंप्यूटर, एडवांस तकनीक के मोबाइल फोन बनाने में मददगार बना है। दिमाग का यह बदलाव अगले 100 वर्षों में कैसा रहेगा और किस तरह से काम करेगा, इस तथ्य का पता लगाया जा रहा है।
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शोध में शामिल होंगे चित्रकार और शिल्पकार

दृश्य कला संकाय के प्रो.एसके नायर ने बताया कि शोध में शिल्पकार और चित्रकार भी शामिल किए जा रहे हैं। वाराणसी के साथ ही बलिया, गाजीपुर, मऊ, सोनभद्र, चंदौली, भदोही, मिर्जापुर आदि जगहों से शिल्पकारों, चित्रकारों की तलाश की जा रही है। इनके जरिये उस वक्त किस तरह के औजार और चित्रों का प्रयोग होता था, उसका पता लगाया जाएगा। साथ ही आगे की कार्यशैली के बारे में भी निष्कर्ष निकाला जाएगा। इसके लिए पहले के औजार व चित्रों का संग्रह बनाया जा रहा है।
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