प्रो. विजय नाथ मिश्रा और उनकी टीम
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चंद्रमा पर पानी, ईंट, मिट्टी व पत्थर ढूंढ रहा है। इसके संकेत साफ हैं। दिमाग वही है, लेकिन उसकी संरचना में तेजी से बदलाव हुआ है। नया ब्रेन सर्किट बना है। जो दिमाग पहले औजार बनाने में मदद करता था, वह अब सुपर कंप्यूटर, एडवांस तकनीक के मोबाइल फोन बनाने में मददगार बना है। दिमाग का यह बदलाव अगले 100 वर्षों में कैसा रहेगा और किस तरह से काम करेगा, इस तथ्य का पता लगाया जा रहा है।
दृश्य कला संकाय के प्रो.एसके नायर ने बताया कि शोध में शिल्पकार और चित्रकार भी शामिल किए जा रहे हैं। वाराणसी के साथ ही बलिया, गाजीपुर, मऊ, सोनभद्र, चंदौली, भदोही, मिर्जापुर आदि जगहों से शिल्पकारों, चित्रकारों की तलाश की जा रही है। इनके जरिये उस वक्त किस तरह के औजार और चित्रों का प्रयोग होता था, उसका पता लगाया जाएगा। साथ ही आगे की कार्यशैली के बारे में भी निष्कर्ष निकाला जाएगा। इसके लिए पहले के औजार व चित्रों का संग्रह बनाया जा रहा है।