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Varanasi News: बीएचयू ने कहा- कई शिक्षकों की शर्तें यूजीसी से मेल नहीं खातीं

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बीएचयू में प्रमोशन को लेकर चल रही तकरार पर विश्वविद्यालय प्रशासन ने दोबारा शुक्रवार को अपना पक्ष स्पष्ट किया है। बीएचयू प्रशासन का कहा है कि प्रमोशन को लेकर कई भ्रांतियां हैं। कई ऐसे शिक्षक हैं जिन्होंने भारत और विदेश में पोस्ट डॉक्टोरल फेलो के रूप में कार्य किया है। उनकी नियुक्तियों की शर्तें यूजीसी के 2018 के दिशानिर्देशों के खंड 10.0 के साथ सीधे तौर पर मेल नहीं खाती हैं। ऐसे मामलों की समीक्षा के लिए एक समिति का गठन किया गया था, जिसकी रिपोर्ट एग्जीक्यूटिव काउंसिल की अगली बैठक में प्रस्तुत की जाएगी।
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उधर, शिक्षकों ने बीएचयू प्रशासन को सीधी वार्ता करने की बात कही है। सात अप्रैल को एक हजार शिक्षकों के जुटने का अनुमान है। सात अप्रैल को बीएचयू के विश्वनाथ मंदिर से लंका तक विरोध मार्च निकाला जाएगा। शिक्षकों ने कुलसचिव कार्यालय के कई अधिकारियों पर कई सवाल खड़े किए हैं।


बीएचयू ने ये भी कहा है कि डायनामिक एश्योर्ड कॅरिअर प्रोग्रेशन स्कीम को विश्वविद्यालय में वर्ष 2018 में स्वीकार किया गया और इसे 29 अक्तूबर 2008 से लागू किया गया। ईसी से अनुमोदित दिशानिर्देश विश्वविद्यालय की वेबसाइट (आरएसी पोर्टल) पर भी उपलब्ध हैं। यह स्कीम इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज के संकाय सदस्यों के लिए भी है। वहीं, डीएसीपीएस स्कीम के तहत साक्षात्कार वर्ष 2019, 2020 और 2024 में आयोजित किए गए हैं। कुछ शिक्षकों के जनवरी 2016 से जून 2018 के बीच पे-लेवल 10 से पे-लेवल 11 पर प्रमोशन के लिए यूजीसी के अनुमोदन का इंतजार है।
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