बीएचयू सिंह द्वार पर प्रदर्शन करते छात्र।
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बीएचयू में समस्याओं को लेकर अब छात्र-छात्रा परिसर में इधर-उधर धरना-प्रदर्शन नहीं कर सकेंगे। विश्वविद्यालय प्रशासन ने इसके लिए जगह का चयन कर लिया है। नए आदेश के बाद अब छात्र-छात्राओं को परिसर के मधुबन में ही धरना देना होगा। इसका उल्लंघन करने वालों के खिलाफ प्रशासन कार्रवाई करेगा।
हॉस्टल में बिजली, पानी, मेस की समस्या हो या फिर प्रवेश, परीक्षा या फिर कोई अन्य समस्या। अब तक छात्र-छात्रा कभी सेंट्रल आफिस, कुलपति आवास के सामने तो कभी हॉस्टल के सामने धरना देते थे। इसके अलावा मांगें पूरी न होने पर बीएचयू सिंह द्वार बंद कर यहां भी छात्र धरना देते हैं। मेन गेट बंद होने से दूर दराज से आने वाले मरीजों, परिजनों के साथ ही कई लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ता है।
26 दिसंबर को जिलाधिकारी कौशलराज शर्मा ने हाईकोर्ट के आदेश का हवाला देते हुए बीएचयू, महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ, संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय और केंद्रीय तिब्बती संस्थान के कुलपति से परिसर में ही धरना प्रदर्शन करने के लिए स्थान चिह्नित करने को कहा था। इसी क्रम में बीएचयू प्रशासन ने मधुबन को धरना स्थल के रूप में चयनित कर लिया है। साथ ही इसके अलावा दूसरी जगहों पर धरना देने वालों के खिलाफ कार्रवाई की चेतावनी दी गई है।
जिला प्रशासन के पत्र के बाद परिसर में मधुबन को धरना-प्रदर्शन स्थल के रूप में चयनित कर लिया गया है। परिसर में इसके अलावा धरना-प्रदर्शन करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
डॉ. राजेश सिंह, पीआरओ, बीएचयू
विद्यापीठ और संस्कृत विवि में पहले से ही तय हैं स्थान
बीएचयू परिसर को छोड़ काशी विद्यापीठ, संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय में धरना-प्रदर्शन का स्थान पहले से ही तय है। इसमें काशी विद्यापीठ में केंद्रीय कार्यालय के सामने महात्मा गांधी की प्रतिमा के पास जबकि संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय में भी छात्र केंद्रीय कार्यालय के सामने धरना देते हैं। इन विश्वविद्यालयों में बहुत कम ही मौका होता है जब छात्र कैंपस से बाहर जाकर धरना देते हैं।