पुलिस अगर शुरू से ही बीएचयू में छात्रा के साथ हुई छेड़खानी के मामले में गंभीरता दिखाती तो शायद महामना का यह शांत-सुरम्य परिसर आज सुलग न रहा होता।
21 सितंबर की शाम जब बीएचयू परिसर में छात्रा के साथ छेड़खानी हुई और छात्राओं ने त्रिवेणी हॉस्टल के समीप आक्रोश जताया तो इसकी जानकारी तत्कालीन लंका थानाध्यक्ष राजीव सिंह को भी हुई थी।
मगर उन्होंने तत्काल मुकदमा दर्ज कर आरोपियों की गिरफ्तारी करना तो दूर, इसका आश्वासन भी छात्राओं को नहीं दिया और बीएचयू प्रशासन का रुख भांपते रहे। इससे आक्रोशित छात्राओं ने 22 सितंबर की सुबह सिंहद्वार पर प्रदर्शन शुरू कर दिया।
छात्र-छात्राओं के मुताबिक 23 सितंबर की रात जब बीएचयू प्रॉक्टोरियल बोर्ड के गार्डों ने वीसी आवास के सामने छात्र-छात्राओं को पीटना शुरू किया तब भी पुलिस मूकदर्शक बनी रही और इसी के बाद बीएचयू परिसर का माहौल अराजक हो उठा।
वहीं, इस प्रकरण में पहले दिन से ही पूर्व सीओ भेलूपुर निवेश कटियार ने भी सजगता नहीं दिखाई और ‘वेट एंड वाच’ की नीति पर काम करते रहे।
बीएचयू परिसर और लंका में पथराव, तोड़फोड़ आगजनी और लाठीचार्ज मामले की जांच पूरी होने के बाद लंका थानाध्यक्ष सहित कई पुलिस अधिकारी कार्रवाई की जद में आ सकते हैं, ऐसा उच्चपदस्थ सूत्रों का मानना है।
1000 अज्ञात छात्र-छात्राओं के खिलाफ मुकदमा
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- फोटो : अमर उजाला
इस मामले में जिन 1000 अज्ञात छात्र-छात्राओं के खिलाफ बलवा, हमला, लूट, आगजनी, तोड़फोड़, सरकारी कार्यों में बाधा डालने, लोकसेवक का आदेश न मानने, 7 सीएलए सहित अन्य आरोपों में मुकदमा दर्ज किया गया है, उनकी तस्दीक कर तफ्तीश आगे बढ़ाने के लिए पुलिस प्रॉक्टोरियल बोर्ड के वीडियो कैमरे की फुटेज की मदद लेगी।
हालांकि, पुलिस अधिकारियों का कहना है कि जो फुटेज हैं उसमें छात्र आगजनी करते और बम फेंकते नहीं दिख रहे हैं। ऐसे में इस मामले में साक्ष्य जुटाना पुलिस के लिए किसी बड़ी चुनौती से कम नहीं होगा।
फिलहाल आरोपी छात्र-छात्राओं की धर-पकड़ के लिए पुलिस की तरफ से कोई कवायद नहीं की जा रही है और माहौल के पूरी तरह सामान्य होने का इंतजार किया जा रहा है।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि दो अक्तूबर के बाद जब विश्वविद्यालय की छुट्टियां खत्म होंगी तो आरोपी छात्र-छात्राओं की तस्दीक कर उनकी गिरफ्तारी की कार्रवाई शुरू की जाएगी।