फिर मंदिर की सीढ़ियों पर मत्था टेका। इसके बाद कुछ लोगों से बलि के बारे में चर्चा की और फिर गंगाघाट की तरफ चला गया। इसके बाद से उसे नहीं देखा गया। चर्चा है कि दो महीने पूर्व बनारस में किसी साधक से उनकी निकटता हुई थी।
इसके कारण उसका सांसारिक चीजों से मोहभंग होने लगा। लोगों के अनुसार, उसने मोबाइल, पैसा आदि किसी न किसी को दान दे दिया। उसने मोटरसाइकिल भी दान देने की चेष्टा की। इन तमाम बातों से यही अनुमान लगाया जा रहा है कि वह पैदल ही कहीं साधना के लिए चला गया।