बीएचयू के सर सुंदर लाल अस्पताल में छह-सात जून को मरीजों की मौत मामले में हर दिन नई-नई जानकारियां सामने आ रही हैं। आईसीयू में मरीजों की मौत के इस मामले में तीन महीने पहले बनी विश्वविद्यालय की जांच कमेटी की रिपोर्ट पूरी हो गई है।
सूत्रों की मानें तो विश्वविद्यालय प्रशासन ने कोर्ट को मामले में अपनी रिपोर्ट सौंप दी है। इस बीच सोशल मीडिया पर एक खबर चल रही है, जिसमें बताया गया है कि जिस कंपनी से अस्पताल में नाइट्रस आक्साइड की आपूर्ति हो रही थी, वह मेडिकल नहीं औद्योगिक उपयोग के लिए पंजीकृत थी। इससे अस्पताल समेत बीएचयू कैंपस में हड़कंप मचा रहा।
ऑपरेशन थिएटर में छह-सात जून को ऑपरेशन के बाद हुई मौत के बाद से ही अस्पताल प्रशासन सकते में हैं। आठ सदस्यीय फैक्ट फाइडिंग कमेटी ने इसमें नाइट्रस आक्साइड और आइसोफ्लोरेन के ओवरडोज की आशंका जताई थी।
15 जून को कुलपति के निर्देश पर आईएमएस डायरेक्टर प्रो. वीके शुक्ला के संयोजन में जांच कमेटी की रिपोर्ट भी आ चुकी है। हालांकि गाजियाबाद स्थित सेंट्रल ड्रग्स कंट्रोल आर्गनाइजेशन कार्यालय के केंद्रीय औषधि उप नियंत्रक ने गैस के नमूने की जांच कर केंद्रीय औषधि नियंत्रक को जो रिपोर्ट दी थी, उसमें पाया गया था कि ऑपरेशन के दौरान जिस गैस का उपयोग किया गया था, वह नॉन फार्मकोपियल गेड की नाइट्रस आक्साइड थी।
इसका प्रयोग मेडिकल क्षेत्र में नहीं किया जाता है। उसमें उन्होंने कंपनी के पास गैस आपूर्ति के लाइंसेस न होने का भी जिक्र किया था।