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खतरे में मरीज: छह महीने से बिना फायर एनओसी के ही चल रहा बीएचयू अस्पताल, हर दिन आते हैं 6000 लोग

Fri, 10 Oct 2025 03:57 PM IST
प्रगति चंद रबीश श्रीवास्तव, अमर उजाला ब्यूरो, वाराणसी।

सार

बीएचयू अस्पताल में पूर्वांचल के सभी शहरों व बिहार, नेपाल के मरीज भी इलाज कराने के लिए आते हैं। यहां हर दिन करीब छह हजार लोग इलाज कराने आते हैं। इसके बावजूद बीएचयू अस्पताल छह महीने से बिना फायर एनओसी के ही चल रहा है। 
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बीएचयू का सुपर स्पेशलिटी ब्लॉक - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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बीएचयू अस्पताल की तीन प्रमुख इमारतें, एमसीएच विंग, सुपर स्पेशियलिटी ब्लॉक और बाल रोग विभाग 6 महीने से ज्यादा समय से बिना अग्निशमन विभाग की एनओसी (नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट) के संचालित हो रहे हैं। इनमें से एमसीएच विंग और बाल रोग विभाग को अब तक एनओसी नहीं मिल पाई है, जबकि सुपर स्पेशियलिटी ब्लॉक (एसएसबी) को पहले किसी तरह एनओसी तो मिल गई लेकिन अब मानकों के अधूरे होने के चलते उसका नवीनीकरण नहीं हो पा रहा है।

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यह स्थिति तब है जब महज चार दिन पहले ही अस्पताल के स्टोर में आग लग चुकी है, जिसे बुझाने के लिए दमकल की चार गाड़ियों को घंटों मशक्कत करनी पड़ी थी। हर दिन 6000 लोग आते हैं, 2000 बेड, 80% बेड हमेशा भरे रहते हैं। 

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कुछ इमारतों को मिली एनओसी 

बीएचयू के ट्रॉमा सेंटर, मनोचिकित्सा विभाग और कुछ अन्य स्थानों को फायर एनओसी मिल चुकी है, लेकिन बाल रोग विभाग, एमसीएच विंग और एसएसबी अभी भी खतरनाक स्थिति में हैं। एसएसबी ब्लॉक में अलार्म सिस्टम ठीक से काम नहीं कर रहा। फायर डोर में क्रॉसबार नहीं है। आपातकालीन निकास मार्गों पर अवैध रूप से सामान रखा गया है। बाल रोग विभाग में हाल ही के निरीक्षण में कमियां मिली थीं, जिनके सुधार की प्रक्रिया बेहद धीमी गति से चल रही है।

अग्निशमन विभाग ने भेजे तीन से अधिक नोटिस 
फायर स्टेशन ऑफिसर इंद्रजीत वर्मा (भेलूपुर कार्यालय) के अनुसार, बीते छह महीनों में ही अस्पताल प्रशासन को तीन से अधिक नोटिस जारी किए जा चुके हैं। निरीक्षण के दौरान सामने आई खामियों को दूर करने को कहा गया था।

एमसीएच विंग में गर्भवती महिलाओं, नवजात का होता है इलाज
अस्पताल में जिस बिल्डिंग में एमसीएच विंग चल रही है, उसको अग्निशमन विभाग से फायर एनओसी नहीं मिली है, उसमें गर्भवती महिलाओं के साथ ही नवजात बच्चों को भर्ती कर इलाज किया जा रहा है। अग्निशमन विभाग के अधिकारियों के अनुसार इस विंग में एनओसी न मिलने के पीछे जो वजह है, वह आग से बचाव के लिए जो भी जरूरी मानक है, वो पूरा न हो पाना है। अगर इस बिल्डिंग में आग लगने जैसी कोई घटना होती है तो उसको तात्कालिक तौर पर बुझाने के लिए भी बड़ी चुनौती होगी।
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एसएसबी में छह विभागों की ओपीडी, आईसीयू, कैथ लैब जैसे महत्वपूर्ण विभाग
अस्पताल में छह मंजिला बनी एसएसबी में सर्जिकल आंकोलॉजी(कैंसर), गैस्ट्रोलॉजी, नेफ्रोलॉजी, इंडोक्राइनोलॉजी, यूरोलॉजी, न्यूरोसर्जरी विभाग की ओपीडी चलती है। इसके अलावा यहां हृदय रोग के गंभीर मरीजों की सर्जरी के लिए कैथ लैब, यूरोलॉजी की ओटी, छठी मंजिल पर आईसीयू भी है। इसके बाद भी यहां आग से बचाव के लिए जरूरी मानक न होना व्यवस्था पर सवाल खड़ा करता है।

चार दिन पहले दमकल की चार गाड़ियों ने एक घंटे में बुझाई थी आग
चार दिन पहले ही बीएचयू अस्पताल के स्टोर रूम में आग लगने से वहां अंदर रखी सीरिंज सहित कई चिकित्सकीय सामग्री जलकर राख हो गई थी। आग इतनी भयावह थी कि फायर ब्रिगेड की एक दो नहीं बल्कि चार गाड़ियों को लगाया गया और तब भी एक घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया गया। अगले दिन कमरे से बाहर निकालकर जला सामान एक प्लास्टिक की थैली में रखवाकर उसको भिजवा भी दिया गया।

बीएचयू अस्पताल में एमसीएच विंग, बाल रोग विभाग की एनओसी लेने और सुपरस्पेशियलिटी ब्लॉक में नवीनीकरण की प्रक्रिया को पूरा करवाया जा रहा है। इसके लिए चिकित्साधीक्षक कार्यालय से औपचारिकताएं शुरू करवाई गई हैं। पूरे प्रकरण में एमएस और अग्निशमन विभाग से बातचीत कर जल्द से जल्द एनओसी, नवीनीकरण को पूरा करवाया जाएगा। - प्रो.एसएन संखवार, निदेशक, आईएमएस बीएचयू

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