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बीएचयू अस्पताल का हालः एक तो खुद लाचार, दूसरे 10 जिलों का भार

Fri, 06 Jul 2018 11:25 AM IST
रबीश श्रीवास्तव, अमर उजाला, वाराणसी
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बीएचयू अस्पताल - फोटो : अमर उजाला
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आपको जानकर हैरानी होगी कि बीएचयू के सर सुंदरलाल अस्पताल और ट्रॉमा सेंटर की आईसीयू को छोड़ दिया जाए तो वाराणसी समेत आसपास के 10 जिलों में सरकारी स्तर पर कहीं यह सुविधा है ही नहीं।
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दुर्घटनाओं, वारदातों जैसे मामलों के घायल ट्रॉमा सेंटर लाए जाते हैं, बाकी मरीजों के लिए बीएचयू अस्पताल का ही सहारा होता है लेकिन यहां 156 की जगह 16 बेड ही उपलब्ध हैं। जबकि, वाराणसी समेत आसपास के दस जिलों से आईसीयू समेत अन्य चिकित्सकीय सुविधाओं के मद्देनजर बेहतर इलाज के लिए यहां रेफर किए जाते हैं।

पढ़ेंः बीएचयू अस्पतालः मरीजों पर भारी पड़ रहा आईसीयू में बेड का इंतजार
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बीएचयू में आईसीयू की सुविधा पर आठ से दस हजार रुपये रोजाना का खर्च आता है लेकिन निजी अस्पतालों में इस सुविधा के लिए तिगुनी रकम चुकानी पड़ती है। आईएमएस बीएचयू में एम्स जैसी सुविधाओं के लिए हाल के दिनों में कवायद तेज हुई है।

सरकारी अस्पतालों की चिकित्सा सुविधा को बेहतर करने के लिए भी केंद्र और प्रदेश सरकार की ओर से सख्ती की गई। बावजूद इसके बुनियादी सुविधाओं और संसाधनों की कमी मरीजों के लिए मुसीबत का सबब बन गई है।

गंभीर स्थितियों में जीवन रक्षा के लिए मरीजों को इंटेंसिव केयर यूनिट (आईसीयू) में भर्ती कराया जाता है लेकिन यहां हालात ऐसे हैं कि चिकित्सकों के रेफर करने के बाद भी मरीजों को आईसीयू में बेड उपलब्ध नहीं हो पाता।

पढ़ेंः बीएचयू अस्पताल का हाल, 1560 बेड की सुविधा मगर आईसीयू में सिर्फ इतने

महज 16 बेड की आईसीयू होने के नाते रोजाना औसतन दस मरीजों को जगह खाली न होने का हवाला देकर लौटा दिया जाता है। ऐसे में दो ही विकल्प होते हैं या तो वे निजी अस्पतालों में जाएं या खुद को ऊपरवाले के भरोसे छोड़कर आईसीयू में बेड खाली होने का इंतजार करें।

ऐसे दर्दनाक हालात यहां रोजाना सामने आते हैं, बावजूद इसके बीएचयू प्रशासन से स्वास्थ्य मंत्रालय तक अब तक कोई ठोस पहल सामने नहीं आई है।

निजी अस्पतालों में जाना मतलब जेब कटनी तय 

- फोटो : अमर उजाला

सरकारी अस्पतालों में आईसीयू न होने पर मरीज मजबूरी में निजी अस्पताल की तरफ भागते हैं। जानकारी के मुताबिक निजी अस्पतालों में किसी मरीज को आईसीयू में भर्ती कर इलाज कराने का एक दिन का खर्च करीब 25 से 30 हजार रुपये पड़ता है।

इसमें बेड चार्ज करीब पांच हजार पड़ता है, बाकी दवाइयां और अन्य खर्च शामिल हैं। इसके सापेक्ष बीएचयू में बेड का चार्ज तो केवल 1200 रुपये है लेकिन दवा आदि का मिलाकर कुल करीब 8 से 10 हजार रुपये रोजाना खर्च हो जाता है।

इन जिलों में नहीं आइसीयू
बलिया, गाजीपुर, सोनभद्र, जौनपुर, भदोही

यहां चालू होने का इंतजार
आजमगढ़ चक्रपानपुर स्थित राजकीय मेडिकल कालेज में 12 बेड का आईसीयू बना है। इसी तरह, मऊ के जिला अस्पताल और चंदौली के जिला अस्पताल में 16 बेड का आईसीयू बनकर तैयार है लेकिन इन तीनों को कहीं स्टाफ और विशेषज्ञों की कमी तो कहीं लापरवाही के चलते चालू नहं किया जा सका। 
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हर जिला अस्पताल में हो आईसीयू

चिकित्सा विशेषज्ञ मानते हैं कि बीएचयू की आईसीयू की क्षमता कम से कम डेढ़ सौ बेड की जानी चाहिए। साथ ही, जरूरी यह है कि हर जिला और मंडलीय अस्पताल में भी आईसीयू की सुुविधि सुनिश्चित कराई जाए। ऐसा होने पर न सिर्फ मरीजों को स्थानीय स्तर पर बेहतर चिकित्सा सुविधाएं मिल पाएंगी बल्कि बीएचयू आईसीयू का बोझ भी हल्का होगा।

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