आपको जानकर हैरानी होगी कि बीएचयू के सर सुंदरलाल अस्पताल और ट्रॉमा सेंटर की आईसीयू को छोड़ दिया जाए तो वाराणसी समेत आसपास के 10 जिलों में सरकारी स्तर पर कहीं यह सुविधा है ही नहीं।
दुर्घटनाओं, वारदातों जैसे मामलों के घायल ट्रॉमा सेंटर लाए जाते हैं, बाकी मरीजों के लिए बीएचयू अस्पताल का ही सहारा होता है लेकिन यहां 156 की जगह 16 बेड ही उपलब्ध हैं। जबकि, वाराणसी समेत आसपास के दस जिलों से आईसीयू समेत अन्य चिकित्सकीय सुविधाओं के मद्देनजर बेहतर इलाज के लिए यहां रेफर किए जाते हैं।
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बीएचयू अस्पतालः मरीजों पर भारी पड़ रहा आईसीयू में बेड का इंतजार
बीएचयू में आईसीयू की सुविधा पर आठ से दस हजार रुपये रोजाना का खर्च आता है लेकिन निजी अस्पतालों में इस सुविधा के लिए तिगुनी रकम चुकानी पड़ती है। आईएमएस बीएचयू में एम्स जैसी सुविधाओं के लिए हाल के दिनों में कवायद तेज हुई है।
सरकारी अस्पतालों की चिकित्सा सुविधा को बेहतर करने के लिए भी केंद्र और प्रदेश सरकार की ओर से सख्ती की गई। बावजूद इसके बुनियादी सुविधाओं और संसाधनों की कमी मरीजों के लिए मुसीबत का सबब बन गई है।
गंभीर स्थितियों में जीवन रक्षा के लिए मरीजों को इंटेंसिव केयर यूनिट (आईसीयू) में भर्ती कराया जाता है लेकिन यहां हालात ऐसे हैं कि चिकित्सकों के रेफर करने के बाद भी मरीजों को आईसीयू में बेड उपलब्ध नहीं हो पाता।
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बीएचयू अस्पताल का हाल, 1560 बेड की सुविधा मगर आईसीयू में सिर्फ इतने
महज 16 बेड की आईसीयू होने के नाते रोजाना औसतन दस मरीजों को जगह खाली न होने का हवाला देकर लौटा दिया जाता है। ऐसे में दो ही विकल्प होते हैं या तो वे निजी अस्पतालों में जाएं या खुद को ऊपरवाले के भरोसे छोड़कर आईसीयू में बेड खाली होने का इंतजार करें।
ऐसे दर्दनाक हालात यहां रोजाना सामने आते हैं, बावजूद इसके बीएचयू प्रशासन से स्वास्थ्य मंत्रालय तक अब तक कोई ठोस पहल सामने नहीं आई है।