टोकन सिस्टम के लिए लगा डिस्प्ले बोर्ड खराब होने से पर्चा जमा करने के बाद डॉक्टर कब देखेंगे, उनकी बारी कब आएगी, इसकी सही जानकारी नहीं मिल पाती है। लिहाजा मरीजों को परेशान होना पड़ता है। हृदय रोग विभाग, मेडिसिन विभाग, ऑन्कोलॉजी, जनरल सर्जरी सहित कई विभागों में डॉक्टर को दिखाने के लिए मारामारी देखने को मिलती है।
केस-1
ऑन्कोलॉजी डिपार्टमेंट की ओपीडी में बिहार से 41 वर्षीय महिला को लेकर परिजन बृहस्पतिवार सुबह पहुंचे। सुबह 10 बजे पर्चा जमा करने के बाद बाहर खड़े रहे। डॉक्टर के कमरे के बाहर टोकन नंबर वाला डिस्प्ले बोर्ड बंद पड़ा था। किसी तरह 12 बजे डॉक्टर को दिखा सके।
केस-2
लालगंज से 15 वर्षीय बच्ची को लेकर परिजन दोपहर में एक बजे मेडिसिन की ओपीडी में पहुंचे। पंजीकरण कक्ष में बैठे कर्मचारी ने 370 मरीजों का पंजीकरण पूरा होने का हवाला देते हुए शुक्रवार को आने की बात कही। इसके बाद परिजन वापस चले गए।
बीएचयू अस्पताल में बृहस्पतिवार को मरीजों को एक्सरे कराने के लिए परेशानी झेलनी पड़ी। ओपीडी से डॉक्टर को दिखाने के बाद मरीज जांच कराने पहुंचे तो वहां एक्सरे कक्ष पर ताला लटका मिला। सबसेे अधिक परेशानी उन मरीजों को हुई जिन्हें परिजन स्ट्रेचर पर लेकर पहुंचे थे।
कमरा नंबर दस में तैनात कर्मचारी ने मशीन खराब होने की वजह से जांच न होने की बात कही तो मरीज और परिजन चिंतित हो गए। बलिया, जौनपुर, बिहार, वाराणसी से कोई पत्नी के साथ जांच कराने पहुंचा था तो किसी को माता/पिता की जांच करानी थी। रेडियोलॉजी विभाग के अध्यक्ष डॉ. आशीष वर्मा ने बताया कि कमरा नंबर पांच में रखी मशीन का सॉफ्टवेयर खराब होने से जांच नहीं हो पाई। इसके अलावा कमरा नंबर 10 वाले मशीन में भी तकनीकी खराबी आ गई थी। दस नंबर वाली मशीन बाद में सही हो गई, जिस पर दोपहर दो बजे के बाद कुछ जांच हुई है।