कोविड से पहले ही घटे पर्यटक
सेमिनार के आयोजक पर्यटन विशेषज्ञ डॉ. राणा प्रवीन ने कहा कि अभी भी बनारस और भारत में जापानी पर्यटकों का काफी कम हिस्सा है। जबकि, बनारस जैसे विदेशी और घरेलू पर्यटक जापान के किसी भी एक शहर में नहीं आते। 2019 तक भारत में 2.38 लाख जापानी पर्यटक आते थे, लेकिन 2020 तक ये संख्या 50 हजार तक सीमित हो गई।
चीन की ओर जा रहे जापानी पर्यटक
डॉ. राणा ने कहा कि जापानी पर्यटकों की कमी के पीछे रिसर्च करने पर पता चला कि उन्हें जो भी सहूलियत काशी या भारत में चाहिए, वो नहीं मिल पाती। इससे जापान के काफी पर्यटक बौद्ध टूरिज्म के लिए चीन चले जा रहे हैं। हमें इसी ट्रेंड को रोकना है। इसके लिए अब सहयोग की खासा जरूरत है। इंडिया-जापान 2025 विजन तैयार किया गया था। बौद्ध सर्किट पर जापान काफी पैसा निवेश कर रहा है। ये निवेश बनारस और भारत भर के बौद्ध स्थलों तक तेजी से लाना होगा।
दिखाया गया सबसे खूबसूरत शहर का पर्यटन मॉडल
सेमिनार में कला संकाय के प्रमुख प्रो. माया शंकर पांडेय और कई विशेषज्ञ मौजूद थे। इनमें शामिल श्रीलंका के छात्र निरदुसा शांतिकुमार और बीएचयू के उज्जवल झा ने कहा कि इस सहयाेग के तहत स्नातक, परा स्नातक और संयुक्त पीएचडी प्रोग्राम शुरू करने होंगे। स्कॉलरशिप और एक्सचेंज प्रोग्राम को भी बढ़ाना होगा।
म्यांमार के प्या फ्यो थांट ने कहा कि जापान के पर्यटन उद्योग ने यहां की संस्कृति और अंतरराष्ट्रीय बाजार को भी प्रभावित किया है। जापान के शहर मियाकोजिमा पर म्यांमार के हितू मायात ह्विंग ने कहा कि ये एक द्वीप पर बसे विश्व के सबसे खूबसूरत शहरों में से एक है। इसकी भौगोलिक और उष्ण कटिबंधीय जलवायु भी इसकी खूबसूरती को बढ़ाती है। बीएचयू के छात्र शशांक कुमार और अनन्य लखेरा ने बताया कि छठवीं शताब्दी में भारत से ही बौद्ध धर्म जापान में गया। इसलिए जापान भारत में बौद्ध सर्किट पर निवेश करता है।