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बीएचयू मीटू प्रकरणः छात्रा ने बीते साल वापस लिया था आरोप, अब दर्ज कराया मुकदमा

Sat, 24 Nov 2018 02:00 PM IST
न्यूज डेस्क,अमर उजाला,वाराणसी
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बीएचयू
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बीएचयू के आयुर्वेद संकाय में रसशास्त्र एवं भैषज्य कल्पना विभाग में शोध छात्रा की ओर से पिछले चार साल से आरोप लगाया जा रहा है। इस बीच शोध छात्रा की ओर से 19 जून 2017 को विभागाध्यक्ष को लिखा गया एक पत्र भी सामने आया है, जिसमें उसने आरोपों को वापस लेने और भूलवश ऐसा होने की जानकारी दी थी। अब पीएचडी की डिग्री पाने के तुरंत बाद मुकदमा दर्ज कराने को लेकर विश्वविद्यालय में तरह-तरह की चर्चाएं भी हो रही हैं।

 

रसशास्त्र विभाग की शोध छात्रा ने वर्ष 2015 में शोध करने के दौरान भी अवकाश स्वीकृत न करने, पुस्तकालय, प्रयोगशाला सहित कई सुविधाएं न दिए जाने, विभाग में अनदेखी करने का आरोप लगाते हुए प्रो. चौधरी समेत दो शिक्षकों की शिकायत कुलपति से की थी। तब मामले को विमेंस ग्रीवांस सेल में भेजा गया। मामले की जांच के दौरान ग्रीवांस सेल ने संबंधित शिक्षकों, शोध छात्रा के साथ ही विभाग की कुछ अन्य छात्राओं और शिक्षकों का भी बयान दर्ज किया।

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पढ़ें : बीएचयू: पीएचडी की डिग्री लेने के तुरंत बाद छात्रा ने प्रोफेसर पर दर्ज कराया ‘मीटू’

 

सूत्रों की माने तो इसकी रिपोर्ट में आरोप गलत पाया गया और क्लीन चिट दे दी गई। इसके बाद 2018 में फिर एक आरोप लगाया, जिसकी जांच आईएमएस के एक प्रोफेसर की अध्यक्षता में बनी कमेटी ने की, उसकी रिपोर्ट भी आ चुकी है।

 

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सीनियर प्रोफेसर ने बताया साजिश

अब शोध छात्रा की ओर से गुरुवार को दीक्षांत समारोह में पीएचडी की डिग्री पाने के बाद छेड़खानी, धमकी सहित अन्य मामले में मुकदमा दर्ज कराने के बाद मामले में नया मोड़ आ गया है। 2017 का जो पत्र सामने आया है, उसमें एक ओर जहां पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है। 
 
वहीं प्रो. चौधरी का कहना है कि इस मामले में दो बार विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से क्लीन चिट दिया जा चुका है। विभाग के ही एक सीनियर प्रोफेसर की साजिश बताते हुए कहा कि जांच में सब कुछ साफ हो जाएगा। साथ ही कहा कि मी टू जैसा कोई मामला नहीं है। 
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