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बीएचयू में गिफ्ट की खरीद में लाखों का घोटाला

Mon, 30 May 2016 02:00 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, वाराणसी
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बीएचयू
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बीएचयू में पुरातन छात्र समागम के नाम पर लाखों रुपये का घोटाला हुआ है। समागम के लिए आयोजित समारोह में अतिथियों और पुरातन छात्र-छात्राओं को वितरित की जाने वाली सामग्री के नाम पर हेराफेरी जाली फर्मों के नाम से की गई है। पुरातन छात्र समागम-2015 के आयोजन के लिए इन वस्तुओं की खरीद में विश्वविद्यालय की विक्रय समिति को भी अंधेरे में रखा गया। गिफ्ट आइटम, स्मृति चिह्न और बैग की खरीद के लिए जिन-जिन फर्मों के नाम पर कोटेशन और ऑर्डर जारी किए गए, उनमें से कई का अता-पता ही नहीं है। घोटाले की शिकायत के बाद कुलपति प्रो. गिरीश चंद्र त्रिपाठी ने मामले की जांच के लिए तीन सदस्यीय जांच समिति गठित कर दी है। मामले में कई प्रोफेसरों के अलावा कर्मचारियों का गला नपने के संकेत हैं।
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प्रो. एसके सिंह की अध्यक्षता वाली जांच समिति ने इस मामले से जुड़े दस्तावेज तलब कर लिए हैं। 24 मई को जांच समिति ने पुरातन छात्र समागम के नाम पर हुई खरीद से जुड़े बिलों और अन्य पत्रावलियों की छानबीन करने के साथ ही इससे जुड़ी अन्य जानकारियां जुटाईं। यह जांच आलोक कुमार सिंह की शिकायत पर शुरू हुई है। आलोक कुमार सिंह ने कुलपति को लिखे पत्र में कहा है कि पुरा छात्र प्रकोष्ठ के समन्वयक और वनस्पति विज्ञान विभाग के प्रो. शशि भूषण अग्रवाल ने कई काल्पनिक फर्मों के नाम पर वस्तुओं की खरीद की है।

आरटीआई के जरिए विश्वविद्यालय की ओर से पुरातन छात्र समागम के लिए की गई खरीद से जुड़ी जानकारी में भी हेराफेरी की पुष्टि हुई है। जिन पांच फर्मों के नाम पर स्मृति चिह्न, बैग खरीदने के लिए कोटेशन दिए गए थे, उनमें से कई फर्मों के पते से डाक लौट आई है। कोटेशन में दिए गए पते पर उन फर्मों का नामोनिशान तक नहीं मिला। समागम के प्रतिभागियों को बैग वितरण के लिए कई फर्मों के जाली लेटर पैड बनाए गए और फर्जी हस्ताक्षर किया गया है। उधर, पुरा छात्र प्रकोष्ठ के समन्वयक प्रो. शशिभूषण अग्रवाल का पक्ष जानने के लिए उनसे फोन पर संपर्क साधा गया लेकिन मोबाइल स्विच्ड ऑफ होने की वजह से बात नहीं हो सकी।
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