आस्ताने पर लगे मेले में झूले का लुत्फ उठाते लोग।
इस साल फिर से गाजी मियां का निकाह नहीं हो पाया। रविवार देर रात सालारपुर स्थित सैयद सालार मसऊद गाजी मियां के रौजे पर जब उनकी बारात पहुंची तो सालों पुरानी रवायत एक बार फिर दोहराई गई। घरातियों-बारातियों में कहासुनी हुई। शादी की रस्म बीच में छोड़कर बारात लौटा दी गई। निकाह अधूरा रह गया और शादी अगले साल तक के लिए टाल दी गई।
गाजी मियां का उर्स रविवार को पूरे शान-ओ-शौकत से मनाया गया। सुबह से ही उनके आस्ताने पर खूब चहल-पहल रही। आस्ताने पर फातिहा पढ़ने वालों और मन्नतें मांगने वालों की जबरदस्त भीड़ थी। इसमें हर वर्ग और हर मजहब के लोग शामिल थे। फातिहा के साथ फूल-माला चढ़ाकर दूरदराज से आने वाले जाइरीन ने मुरादें मांगीं और मन्नतों की चादरें चढ़ाईं। देर रात तक लोग वहां जुटे रहे और मुरादें मांगने का सिलसिला भी चलता रहा।
जैनपुरा छहमुहानी स्थित मोहम्मद सलाउद्दीन के आवास से गाजी मियां की जब बारात निकली तो हर अकीदतमंद बाराती बनने के लिए बारात में शामिल हो गया। सजधज कर लोग बारात लेकर पहले हजरत अलवी शहीद के आस्ताने पर पहुंचे। यहां की जियारत कर लोग गाजी मियां के रौजे पर पहुंचे। परंपरा के अनुसार निकाह टला और बारात लौट गई।
गाजी मियां के अस्ताने पर लगे मेले में जमकर भीड़ उमड़ी। दूकानों पर महिलाओं की भीड़ लगी थी तो झूले और चरखी बच्चों के लिए आकर्षण का केंद्र बने हुए थे। खानपान और खिलौनों की दूकानों पर बच्चों की खासी भीड़ लगी हुई थी। मेले में सुलतान क्लब की ओर से नि:शुल्क चिकित्सा व गुमशुदा बच्चों के लिए सहायता शिविर लगाया गया। अध्यक्ष डॉ. एहतेशामुल हक की देखरेख में लगाए गए इस शिविर में भटके हुए 42 बच्चों को उनके अपनों से मिलाया गया। 425 लोगों का स्वास्थ्य परीक्षण किया गया।