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BHU: पूर्व कुलपतियों ने प्रो. जीसी त्रिपाठी के बयान पर जताया आश्चर्य

Thu, 30 Nov 2017 02:22 PM IST
ब्यूरो,अमर उजाला,वाराणसी

सार

BHU vice chancellor
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विदाई समारोह में बोले बीएचयू के कुलपति प्रो. जीसी त्रिपाठी - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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बीएचयू में कुलपति पद पर अपने कार्यकाल के अंतिम दिन प्रो. जीसी त्रिपाठी की ओर से कुलपतियों की नियुक्ति योग्यता पर न होने के बयान को दो पूर्व कुलपतियों ने खारिज कर दिया है। उनके इस बयान पर प्रो. लालजी सिंह, प्रो. पंजाब सिंह ने आश्चर्य व्यक्त करते हुए इस बयान को गलत बताया है। दोनों पूर्व कुलपतियों का कहना है कि इस पद के बारे में इस तरह की बात करना ठीक नहीं है। 
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प्रो. त्रिपाठी के इस बयान पर पूर्व कुलपति प्रो. लालजी सिंह ने कहा कि चाहे किसी भी क्षेत्र में हो इस पद पर योग्यता जरूरी होती है। जब तक योग्यता नहीं होगी तब तक कोई सम्मान नहीं देगा। उन्होंने कुलपति की ओर से खुद की नियुक्ति भी योग्यता पर न होने के  बयान पर कहा कि इससे उनकी मानसिकता का पता चलता है। इस तरह का बयान बिल्कुल गलत है।

योग्य न मिलने पर अयोग्य नियुक्ति पर प्रो. सिंह ने कहा कि सब विश्वविद्यालयों में बीएचयू का वीसी अलग होता है। इसके बाद इस तरह का बयान देना ठीक नहीं है। कुलपति नियुक्ति की प्रक्रिया होती है जो लंबी चलती है। देर भले ही हो जाए लेकिन योग्यता पर होती है। उदाहरण के साथ बताया कि एक छात्र फेल हो गया तो दूसरे को कहता है कि मै ही नहीं फेल हुआ हूं,दूसरा भी फेल हुआ है। ऐसे में अपनी कमजोरी छिपाने के लिए की गई नियुक्तियों पर इस तरह का बयान दिया गया। 
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कुलपति पद पर योग्यता के आधार पर नियुक्ति न होने के बयान पर पूर्व कुलपति प्रो. पंजाब सिंह का कहना है कि इस पद पर बैठे लोगों को इस तरह की बात शोभा नहीं देती। इस बारे में उनसे बेहतर और कौन बता पाएगा कि नियुक्ति कैसे होती है। कुलपति की नियुक्ति प्रक्रिया के बारे में सभी को पता है।

मानव संसाधन मंत्रालय की ओर से इसके लिए विज्ञापन निकाला जाता है। फिर सर्च कमेटी बनती है और इसके बाद योग्यता के आधार पर नियुक्ति की जाती है। कहा कि पिछले सप्ताह ही मानव संसाधन विकास मंत्री प्रकाश जावडेकर से मुलाकात के दौरान विश्वविद्यालय के बारे में बातचीत हुई।

उस दौरान उन्होंने जल्द ही कुलपति नियुक्ति की प्रक्रिया पूरी होने की जानकारी दी। मजबूरी में अयोग्य लोगों की नियुक्ति की बात है, तो ऐसी नौबत ही क्यों आने दी गई..? पहले से तैयार सूची अगर ऐसी आ गई थी तो उसमें बदलाव भी हो सकता था। 
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प्रो. जीसी त्रिपाठी ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय में संभाला कामकाज

बीएचयू - फोटो : self
बीएचयू में कुलपति के अपने कार्यकाल के आखिरी दिनों में विवादों में घिरे रहे प्रो. जीसी त्रिपाठी इलाहाबाद विश्वविद्यालय (इविवि) में अपने मूल विभाग में लौट आए हैं और मंगलवार को कामकाज संभाल लिया है। जल्द ही उन्हें अर्थशास्त्र विभाग में क्लास आवंटित कर दी जाएगी। अब उनके यहां पदभार संभालने के बाद तमाम तरह की चर्चाएं भी तेज हो गई हैं।

प्रो. त्रिपाठी ने बीएचयू में बतौर कुलपति 26 नवंबर 2014 को ज्वाइन किया था। तीन साल का कार्यकाल पूरा होने के बाद वह इलाहाबाद विश्वविद्यालय आ गए। हालांकि उन्हें अभी उनके मूल विभाग अर्थशास्त्र में क्लास एलॉट नहीं की गई है। विभागीय सूत्रों का कहना है कि दिसंबर के पहले हफ्ते से एमए की सेमेस्टर परीक्षाएं शुरू होने जा रही हैं, ऐसे में शुरुआत में उन्हें बीए की कक्षाएं एलॉट की जा सकती हैं।

उनकी ज्वाइनिंग के बाद चर्चा शुरू हो गई है कि इविवि में दो पूर्व वीसी हो गए हैं। इनके अलावा नैनो टेक्नोलॉजी विभाग के प्रो. अविनाश चंद्र पांडेय बुंदेलखंड विश्वविद्यालय के वीसी रह चुके हैं।

हालांकि कुछ माह पहले यहां तक चर्चा शुरू हो गई थी कि 28 अप्रैल को इविवि में बदलाव के बाद मानव संसाधन विकास मंत्रालय किसी कार्रवाई के तहत इविवि के कुलपति को छुट्टी पर भेज देता है तो प्रो. त्रिपाठी को कार्यकाल पूरा होने के बाद इविवि की जिम्मेदारी सौंप दी जाएगी। हालांकि इस तरह की चर्चाएं उसी दिन खत्म हो गईं, जब बीएचयू में विवाद के बाद उन्हें छुट्टी पर जाना पड़ा।
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