यह शोध अंतरराष्ट्रीय पत्रिका नेचर स्प्रिंगर समूह में प्रकाशित हुआ है। शोध में विशेषज्ञों ने पाया कि मूत्र में उपस्थित एक्सोसोमल माइक्रोआरएनए कैंसर की पहचान के लिए अत्यंत स्थिर और विश्वसनीय बायोमार्कर के रूप में कार्य करते हैं। अध्ययन में यह भी पाया गया कि ये बायोमार्कर कैंसर के विभिन्न चरणों के अनुसार अलग-अलग स्तर पर व्यक्त होते हैं, जिससे न केवल प्रारंभिक पहचान बल्कि रोग की प्रगति की निगरानी भी संभव हो सकती है।
प्रमुख अन्वेषक डॉ. समरेंद्र कुमार सिंह ने कहा कि यह अध्ययन कैंसर निदान के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण कदम है। केवल मूत्र के नमूने से कैंसर की पहचान भविष्य में जांच प्रक्रिया को अधिक सरल और रोगी-अनुकूल बना सकती है। यूरोलॉजिस्ट डॉ. ललित कुमार ने कहा कि यह अध्ययन मूत्राशय कैंसर के गैर-आक्रामक और रोगी-अनुकूल निदान की दिशा में एक आशाजनक बदलाव का संकेत देता है।