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Varanasi: बीएचयू के डॉक्टरों व नाविकों ने बचाई कर्नाटक के युवक की जान, चार महीने पहले घाट पर मिला था बेहोश

Mon, 13 May 2024 01:28 PM IST
प्रगति चंद अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।

सार

चार महीने पहले काशी घूमने आए कर्नाटक के युवक को घाट पर बेहोश पाया गया था। नाविकों ने उसे बीएचयू में भर्ती कराया। जिसके बाद न्यूरोलॉजी विभाग के डॉक्टरों के प्रयास से युवक की स्थिति ठीक होने लगी। अब उसके हाथ-पैर काम करने लगे हैं।
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बीएचयू अस्पताल में परिजनों और जान बचाने वाले नाविकों ले साथ गोपी - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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आईएमएस बीएचयू के डॉक्टरों की टीम ने कर्नाटक के उस युवक की जान बचाई है, जो कि चार माह पहले घाट पर बेहोश होकर गिर गया था। नाविकों ने उसे 26 दिसंबर को बीएचयू अस्पताल में भर्ती कराया। जहां न्यूरोलॉजी विभाग के डॉक्टरों की टीम ने उसका इलाज किया। बीएचयू अस्पताल में चार महीने तक इलाज चलने के बाद अब उसके शरीर के अंग काम करने लगे हैं। मरीज और उसके परिजनों ने जहां डॉक्टर के इलाज की सराहना की है वहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी इसके लिए बधाई दी है कि उनकी पहल पर बनी सुपर स्पेशलिटी ब्लॉक में उन्हें बेहतर सुविधाएं मिलीं। 

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यह है मामला
कर्नाटक के बेल्लारी से दिसंबर में काशी भ्रमण पर अकेले आए युवक गोपी (29) घाट पर अचानक गिर गए। वे बेहोशी हालत में पड़े थे। घाट पर मौजूद नाविकों की नजर पड़ी तो उन्होंने पहले गोपी को पास के अस्पताल में भर्ती कराया। उसके बाद उन्हें बीएचयू  इमरजेंसी लाया गया जहां न्यूरोलॉजी विभाग के डॉक्टरों ने उनका उपचार शुरू किया। 

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मरीज गोपी के साथ प्रो. बीएन मिश्रा, डॉक्टर अभिषेक पाठक - फोटो : अमर उजाला
न्यूरोलॉजी विभाग के अध्यक्ष प्रोफेसर बीएन मिश्रा, डॉ. अभिषेक पाठक ने अपनी टीम के साथ मरीज का इलाज शुरू किया। प्रो. मिश्रा के अनुसार करीब चार महीने के इलाज के दौरान डेढ़ महीने आईसीयू में इलाज हुआ। फिर वार्ड में शिफ्ट किया गया। अब मरीज के हाथ, पैर सहित शरीर की अन्य नसें काम करने लगी हैं। 

डॉक्टर अभिषेक पाठक कहना है कि मरीज को जीबी सिंड्रोम हो गया था। इसको गिया बारी सिंड्रोम कहा जाता है। इसमें मरीज की नसों में सूजन आता है और काम करना बंद कर देती हैं। मरीज के इलाज में न्यूरोलॉजी विभाग की टीम के साथ ही आईसीयू की टीम ने भी पूरा सहयोग किया।
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