चीफ प्रॉक्टर रोयाना सिंह की सुरक्षा में लगे सुरक्षाकर्मियों की वर्दी को लेकर बीएचयू एक बार फिर चर्चा में हैं। जिसके कारण चीफ प्रॉक्टर विवादों में फंसती नजर आ रही है। बताया जाता है कि रोयाना सिंह की सुरक्षा में तैनात प्रॉक्टोरियल बोर्ड के सुरक्षाकर्मी अनुचित तरीके से सेना की हूबहू वर्दी पहन कर उनके साथ या अकेले घूमते नजर आ रहे हैं।
लोग सुरक्षकर्मियों को देखकर सेना का जवान समझने लगते हैं। वहीं यह भी चर्चा हो रही कि चीफ प्रॉक्टर नियम कानून को किनारे रखकर सिर्फ रूआब दिखाने के लिए सुरक्षाकर्मियों को सेना की वर्दी पहना रही है।
बताते चलें कि बीएचयू सुरक्षाकर्मियों की वर्दी को लेकर यह पहला मामला नहीं है। सुरक्षाकर्मी पहले खाकी वर्दी पहनते थे। जो पुलिस की वर्दी तरह दिखती थी। इसी दौरान बीएचयू परिसर हंगामा या लाठीचार्ज होने की स्थिति में यह पता ही नहीं चल पाता था कि डंडा पुलिस ने चलाया या फिर सुरक्षाकर्मियों ने। जब चीफ प्रॉक्टर से बात करने की कोशिश की गई तो उनका फोन नहीं उठा।
एसएसपी ने दी थी चेतावनी
बीएचयू
खाकी वर्दी के गलत इस्तेमाल को देखते हुए वाराणसी के पूर्व एसएसपी आरके भारद्वाज ने लाठीचार्ज की घटना के बाद बीएचयू कुलसचिव को पत्र लिखकर बीएचयू सुरक्षाकर्मियों की वर्दी को बदलने के लिए कहा था। उन्होंने स्पष्ट कर दिया था कि यदि वर्दी का रंग नहीं बदला तो कार्रवाई की जाएगी। इसके बाद बीएचयू के सुरक्षाकर्मियों ने उस वर्दी उतार दिया था।
उधर, द प्राइवेट सिक्योरिटी एजेंसी रेग्यूलेशन एक्ट 2005 के अधिनियम की धारा 21 के तहत कोई व्यक्ति, प्राइवेट सिक्योरिटी गार्ड या सुपरवाइजर आर्मी, एयरफोर्स, नेवी, पुलिस या किसी अन्य सशस्त्र बल के समान या मिलती जुलती वर्दी नहीं पहन सकता। अगर वह ऐसा करता है तो जुर्माना या दंड का भागी होगा। सेना की वर्दी सिर्फ सेना के जवान ही पहन सकते है।