मानव को आकार देने वाले विज्ञान को जानेंगे छात्र...
- दक्षिण एशिया की पुरातात्विक कालक्रम पर चर्चा होगी, जो पाषाण युग से लौह युग तक फैली हुई है।
- कोर्स मे दक्षिण एशिया के कृषि के विकास पर विशेष ध्यान दिया गया है।
- प्रारंभिक कृषि क्रांति, पशुपालन और जंगली जानवरों से घरेलू पशुओं के क्रमिक विकास को शामिल किया गया है।
- कांस्य और लौह युगों में औजारों का निर्माण और सभ्यताओं का उदय बताया गया है।
- सिंधु-सरस्वती घाटी और गंगा घाटी के मानव और पशु अवशेषों का वैज्ञानिक विश्लेषण होगा।
- मानव उत्पत्ति के उन परिवर्तनों को बताया जाएगा, जिन्होंने मानव को आकार दिया।
- आधुनिक मानवों का अफ्रीका से बाहर प्रवास और दक्षिण एशिया की आनुवंशिक विविधता पर विस्तार से चर्चा होगी।
- नीएंडरथल, डेनिसोवांस जैसे प्राचीन मानवों और जीनोमिक रहस्यों को भी गहराई से समझाया जाएगा।
- कोर्स का एक महत्वपूर्ण भाग प्राचीन डीएनए तकनीक पर केंद्रित है। इसमें इसकी ऐतिहासिक विकास, मानव विकास में भूमिका, पशुपालन की जीन तकनीक, लैक्टोज सहनशीलता तथा रोगों के प्रभाव जैसे पहलुओं को शामिल किया गया है।